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मोदी की परिसीमन नीति से दक्षिण भारत होगा उत्तर का उपनिवेश: केरल सांसद जॉन ब्रिट्टास

Byadmin

Apr 16, 2026
Modi’s delimitation will make South India a colony of North: Kerala MP John Brittas

मोदी सरकार का परिसीमन प्रस्ताव: दक्षिण भारत में असंतोष और विरोध

1976 में, इंदिरा गांधी ने संसद में प्रत्येक राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या को स्थिर कर दिया था। इसका तर्क स्पष्ट था कि परिवार नियोजन में अग्रणी राज्यों को अपनी प्रतिनिधित्व संख्या में कटौती नहीं सहनी चाहिए।

अब, मोदी सरकार इस रोक को समाप्त कर संसद की परिसीमन प्रणाली में बदलाव करना चाहती है। इसके लिए एक विशेष सत्र भी बुलाया गया है ताकि यह बिल पारित हो सके।

दक्षिण भारत में इस प्रस्ताव को लेकर गहरा विरोध है क्योंकि इसका सीधा असर इस क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। केरल से राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिट्टास का मानना है कि यह योजना दक्षिण को उत्तर का उपनिवेश बनाने की दिशा में एक कदम है।

ब्रिट्टास के अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन परिवार नियोजन में हो रहे प्रगति को नजरअंदाज करता है और उन राज्यों के वोटिंग अधिकारों को कम कर देता है जिन्होंने सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिण भारत के विकास एवं राजनीतिक प्रभाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

परिसीमन का इतिहास समझना आवश्यक है। 1976 के बाद, भारत ने परिवार नियोजन क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, खासकर दक्षिणी राज्यों में। किन्तु यदि वर्तमान प्रस्ताव पारित हुआ, तो वे राज्यों की संसद में उनकी संख्या घट जाएगी जो जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी रहे हैं।

इस तथ्य को लेकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक दृष्‍टिकोण से बहस आवश्यक हो जाती है कि क्या प्रतिनिधित्व केवल जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए, या सामाजिक-आर्थिक बदलावों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

सरकार का तर्क है कि वर्तमान प्रणाली असंतुलित है और बदलाव आवश्यक हैं ताकि भारत के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व तदनुसार हो सके। हालांकि, दक्षिण भारत के प्रतिनिधि इन बदलावों को समानता और न्याय के खिलाफ मानते हैं।

इस मुद्दे पर आगामी संसद सत्र में तीव्र बहस की संभावना है जिसमें विभिन्न प्रदेशों के सांसदों के बीच मतभेद उभर कर सामने आएंगे।

अतः यह स्पष्ट है कि परिसीमन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति वितरण से जुड़ा संवेदनशील विषय है जिसे सभी पक्षों की सहमति से हल करना आवश्यक होगा।

1976 में इंदिरा गांधी ने प्रत्येक राज्य के संसद में सीटें स्थिर कर दी थीं ताकि परिवार नियोजन पर अच्छे अंक पाने वाले राज्यों की संख्या घटे नहीं।

अब मोदी सरकार इस फ्रीज को समाप्त कर नए विधेयक लाई है, जिन पर शीघ्र पारित के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है।

दक्षिण के विरोध के कारणों को समझने के लिए, स्क्रॉल ने केरल के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिट्टास से बातचीत की।

यह विवाद विस्तार से आकाशीय राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को छूता है, जिसका असर आगामी चुनावों और राज्यों के विकास पर गहरा होगा।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)