• Wed. Jul 15th, 2026

Report By : ICN Network

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा इस वर्ष कक्षा 10वीं की हाई स्कूल और कक्षा 12वीं की इंटरमीडिएट परीक्षाएँ 24 फरवरी को प्रारंभ होकर मार्च के मध्य तक सफलतापूर्वक संपन्न कराई गईं। करीब 51 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने इन दोनों स्तरों की परीक्षाओं में हिस्सा लिया और 17 मार्च से 261 मूल्यांकन केंद्रों पर 1,34,723 परीक्षक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं, ताकि परीक्षा का निष्पक्ष और पारदर्शी परिणाम सुनिश्चित हो सके।

शैक्षणिक जानकारों के अनुसार UP बोर्ड अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम जारी कर सकता है। हालांकि परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी तक तारीख निर्धारित नहीं की गई, लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों की उत्सुकता को देखते हुए बोर्ड प्रशासन पूरी तैयारी के साथ काम में व्यस्त है। परिणाम घोषित होते ही upmsp.edu.in और upresults.nic.in पर परिणाम अपलोड कर दिया जाएगा।

परिणाम उपलब्ध होते ही विद्यार्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर और स्कूल कोड दर्ज करेंगे। सबमिट करते ही स्क्रीन पर अंक और अंकीय विवरण प्रकट होंगे, जिन्हें भविष्य के लिए डाउनलोड करके सुरक्षित रखना चाहिए। ऐसे विद्यार्थी जिनके फोन या इंटरनेट कनेक्शन में दिक्कत हो, वे नजदीकी कॉपी सेंटर या स्कूल प्रशासन से भी सहायता लेकर अपना परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

पिछले वर्ष हाई स्कूल में पास प्रतिशत 89.55 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 82.60 प्रतिशत रहा था, जिसमें प्रदेश भर के कई छात्र-छात्राओं ने 590 से अधिक अंक प्राप्त किए थे। इस बार भी समान रूप से उत्कृष्ट परिणाम की उम्मीद है और टॉपर लिस्ट में 590 से ऊपर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय में शिक्षक‑छात्र अनुपात सुधारने, अतिरिक्त शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने के निर्देश जारी किए गए हैं। बेसिक एजुकेशन विभाग की टीमों ने सभी जिलों में निरंतर निरीक्षण का कार्य आरंभ कर दिया है, ताकि परिणाम आने के बाद विद्यार्थी व अभिभावकों को समय पर मार्गदर्शन और करियर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा सके।

परिणाम घोषित होने के बाद विद्यार्थियों से अनुरोध है कि वे आत्मविश्वास के साथ अपने अगले शैक्षणिक विकल्पों—चाहे स्नातक पाठ्यक्रम हो या तकनीकी एवं डिप्लोमा कोर्स—पर विचार करें और करियर काउंसलर से परामर्श लेकर निर्णय लें। अभिभावकों से भी अपील है कि वे बच्चों का मनोबल बढ़ाएँ और उन्हें सकारात्मक माहौल प्रदान करें, ताकि वे अपने उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ सकें।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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