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नोएडा: करोड़ों की क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की धोखाधड़ी

नोएडा की एक कंपनी के संचालक ने अपने कारोबारी साझेदार और अन्य लोगों पर करोड़ों की क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। आरोप है कि वर्चुअल वॉलेट की गोपनीय जानकारी हासिल कर डिजिटल संपत्तियां बिना अनुमति ट्रांसफर कर दी गईं। साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

दिल्ली के विवेक विहार निवासी प्रतीक गौरी की सेक्टर-62 में कंपनी है। उनकी मुलाकात 2021 में दिल्ली और गुरुग्राम में प्रतीक द्विवेदी से हुई थी। दोनों ने मिउत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित तुर्क और कैकोस द्वीप समूह में कारोबार के लिए फाइवआयर टेक्नोलॉजी नाम से फॉरेन एक्सचेंज कंपनी बनाई। 

कंपनी का कार्यालय नोएडा सेक्टर-62 में भी खोला गया था, जहां दोनों निदेशक के रूप में कार्यरत थे। कंपनी फॉरेन एक्सचेंज और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा कारोबार करती थी।शिकायत के अनुसार, दोनों ने ‘सिंपल एग्रीमेंट फॉर फ्यूचर टोकन्स’ (एसएएफटी) मॉडल के जरिए करीब 2 करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। दावा किया  है कि कंपनी ने मात्र 11 महीनों में यूनिकॉर्न कंपनी का दर्जा भी हासिल कर लिया। 

इसके बाद निवेशकों और कंपनी की राशि डिजिटल वॉलेट से जमा की जाने लगी। इसके लिए करीब 13 डिजिटल वॉलेट बनाए गए, जिनमें यूएसडीटी, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो संपत्तियां रखी गईं। इन वॉलेट्स तक पहुंच दोनों निदेशकों के पास संयुक्त रूप से थी। आरोप है कि अगस्त 2025 से प्रतीक द्विवेदी ने राहुल रौतेला, युवराज रघुवंशी, हिमांशु शर्मा, उत्कर्ष द्विवेदी, अमन द्विवेदी, करण अहलूवालिया, अविरल अग्रवाल और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा शुरू किया।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )