भारत अगले 20-25 वर्षों में विश्व का प्रमुख रक्षा निर्यातक देश बनेगा: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दो दशकों में भारत रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरेगा और दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा उत्पाद निर्यातक देश बनेगा। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करने से कोई भी रोक नहीं सकता।
राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के शिरडी के साईंबाबा धाम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान निबे ग्रुप के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स और आर्टिलरी शेल प्रोडक्शन प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी उपस्थित थे।
रक्षा मंत्री ने बताया कि आने वाले युद्धों में यह तय होगा कि किसी देश के पास कितनी उन्नत तकनीक और हथियार हैं, न कि केवल सैनिक संख्या। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया तथा भारतीय सेना द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान दिखाए गए पराक्रम को रेखांकित किया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत जमीन, आकाश और अंतरिक्ष में रक्षा के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने निजी उद्योगों की भी सराहना की और कहा कि निजी कंपनियां भविष्य की युद्ध तकनीकों को समझ रही हैं और उन्हें मजबूत करना आवश्यक है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत अपनी रणनीतिक शक्ति से वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने जोर दिया कि भारत ने केवल अपनी रक्षा की है और हर आक्रमणकारी को सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया है।
फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों की सफलता पर प्रकाश डालते हुए उल्लेख किया कि रक्षा क्षेत्र ने इसे मजबूती से अपनाया है और भारत अब बड़े पैमाने पर रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है।
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना की सटीक कार्रवाई ने विश्व को प्रभावित किया। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा ड्रोन प्राप्त करने के प्रयासों को विफल बताया, जिससे कोई भी मिसाइल या ड्रोन भारत की भूमि पर गिराने में असमर्थ रहा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नासिक, पुणे, नागपुर और अहिल्यानगर में रक्षा कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में है, जिससे महाराष्ट्र की रक्षा उत्पादन क्षमता और बढ़ेगी।
निबे ग्रुप के चेयरमैन गणेश रमेश निबे ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक पल बताया, जो न केवल रोजगार सृजन करेगा, बल्कि नए इंजीनियरों और नवाचारकर्ताओं को भी प्रेरित करेगा।