मणिपुर में नागा पुरुषों के अपहरण की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी करेगी
मणिपुर के मुख्यमंत्री यूमन खेमचंद सिंह ने शनिवार को कहा कि छह नागा पुरुषों के अपहरण की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाएगी। यह महत्वपूर्ण निर्णय तब लिया गया जब यूनाइटेड नागा काउंसिल के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने इम्फाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पहाड़ी जिलों की स्थिति पर चर्चा की।
एनआईए को जांच सौंपने का निर्णय मामले की गंभीरता को दर्शाता है, जिसमें राज्य के कांगपोक्पी और सेनापति जिलों में पांच की हत्या और कई के अपहरण की घटनाएँ शामिल हैं। इस मसले पर क्यूकी जनजाति के प्रमुख संगठन क्यूकी इंपी मणिपुर ने समुदाय के अधिकारों, गौरव और भविष्य की रक्षा के लिए अपना बंद 48 घंटे और बढ़ा दिया है।
क्यूकी समूहों का आरोप है कि नागा समूहों द्वारा 14 समुदाय के सदस्यों को बंदी बनाया गया है, जिनमें तीन नाबालिग छात्र भी शामिल हैं। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम के अनुसार 13 मई को कांगपोक्पी और सेनापति जिलों में सशस्त्र समूहों ने 38 से अधिक क्यूकी और नागा समुदाय के लोगों का अपहरण किया था।
यह अपहरण घटनाएं तब हुईं जब तीन चर्च नेताओं को उनकी कार पर हमले में मार दिया गया और पांच अन्य घायल हो गए। ये हमले उन लोगों पर हुए जो चुराचंदपुर से कांगपोक्पी लौट रहे थे। नॉनी जिले में एक नागरिक की हत्या और उसकी पत्नी को भी गोली लगी है।
पुलिस ने 15 मई को बताया कि अपहरण किए गए 28 व्यक्तियों को रिहा कर दिया गया है, परन्तु एक अज्ञात पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। इस पूरे प्रकरण में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन तथा राज्य सरकार सभी पक्षों को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है।
मणिपुर की राज्य सरकार ने इस घटना को लेकर संवेदनशीलता दिखाई है एवं राज्य में शांति बहाली के लिए एनआईए की विशेषज्ञ जांच को महत्व दिया है। आगे की जांच में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है ताकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।