गोवंडी नाला प्रदूषण: जांच तेज, बीएमसी पूर्वी वार्ड की लापरवाही पर उठ रहे सवाल
मुंबई के गोवंडी नाला में प्रदूषण की समस्या फिर से जांच के घेरे में आ गई है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) द्वारा की गई जांच में बीएमसी के पूर्वी वार्ड पर नियंत्रण स्थापना और प्रदूषण रोकने में की गई कथित लापरवाही सामने आई है, जिससे संबंधित वार्ड प्रशासन की खिंचाई हो रही है।
गोवंडी-मंखुर्द क्षेत्र में नाले के पानी के रंग बदलाव और दुर्गंध को लेकर दर्ज शिकायतों के बाद MPCB ने इसे निरीक्षण के लिए भेजा। जांच में अवैध कचरा नाले में गिराए जाने और बिना शोधन के जल निकासी में छोड़े जा रहे प्रदूषित जल की शिकायतें मिलीं, जिनकी रिपोर्ट तत्काल पूर्वी वार्ड के सहायक आयुक्त को भेजी गई।
यह क्षेत्र लंबे समय से मुंबई में प्रदूषण के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ आसपास के कूड़ा स्थल, औद्योगिक गतिविधियाँ और घनी अनौपचारिक बस्तियाँ पर्यावरणीय संकट को बढ़ावा देती हैं। विभिन्न पर्यावरणीय अध्ययनों ने कई बार तत्वों का उच्च स्तर, विषैले उत्सर्जन और जल तथा वायु की गुणवत्ता में गिरावट की बात कही है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। कूड़ा, अपशिष्ट और अवशिष्ट पदार्थों का लगातार नाले में गिरना, यहाँ की आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
पूर्व में भी बीएमसी के पूर्वी वार्ड को कूड़ा प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण के अभाव के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा है। मानसून के पास आते ही पानी भराव और भीषण पर्यावरणीय संकट के खतरे को देखते हुए, तुरंत प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बढ़ गई है ताकि बाढ़ और स्वास्थ्य जोखिमों को रोका जा सके।
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