NEET-UG परीक्षा विवाद: कांग्रेस ने उठाया सवाल, सुधारों की मांग तेज
महाराष्ट्र में थाने जिला कांग्रेस समिति द्वारा NEET-UG 2026 प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध स्वरूप “छात्रों की गुंजन” अभियान को व्यापक रूप दिया गया है। यह अभियान भारत के प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों पर ध्यान आकर्षित करने का हिस्सा है। लगातार परीक्षा से जुड़े विवादों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है, जिससे विद्यार्थियों में असंतोष बढ़ा है।
थाने में आयोजित प्रेस वार्ता में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, अचानक परीक्षा रद्दीकरण और प्रशासनिक विलंब की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई। कहा गया कि इन घटनाओं ने छात्रों के शैक्षिक भविष्य को प्रभावित किया है और उनके साथ-साथ वित्तीय तथा भावनात्मक दबाव भी बढ़े हैं। राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की साख कमजोर हुई है, जो प्रशासनिक कमियों की गहराई को दर्शाता है। तटी स्कैम सहित पूर्व परीक्षा विवादों को भी इस संदर्भ में उदाहरण के रूप में पेश किया गया।
अधिकारियों और परीक्षा रैकेट में शामिल पाए जाने वाले तत्वों की पहचान के लिए स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। साथ ही, राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नैतिक आधार पर इस्तीफे की भी मांग की गई।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की गई और मौजूदा परीक्षा ढांचे में व्यापक पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई। यह प्रस्ताव रखा गया कि परीक्षाएं पूर्व निर्धारित वार्षिक कार्यक्रम के तहत आयोजित की जाएं ताकि छात्रों में असमंजस की स्थिति समाप्त हो और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े। बेहतर योजना, कड़ाई से प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को अपनाने को जरूरी ठहराया गया।
“छात्रों की गुंजन” अभियान के समर्थन में विजेता एकेडमी के निदेशक सतिश जाधव ने भी छात्रों को निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता जैसे रवींद्र कोली, अाजिंक्य भोइर, मनोज दुबे, राजेश मिश्रा, तरूण सिंह, अधिवक्ता मनोज डाकवे और गोपाल सावंत भी मीडिया संवाद में मौजूद थे, जिन्होंने एकजुट होकर अभियान का समर्थन किया।
आगे की योजना के तहत इस अभियान का अगला चरण 30 जून से 28 शहरों में प्रारंभ किया जाएगा। कॉलेजों में विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जागरूकता सामग्री वितरित की जाएगी एवं जिला कलेक्टर कार्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। यह अभियान बड़े पैमाने पर “दिल्ली चलो” रैली के साथ समाप्त होगा, जिसके माध्यम से परीक्षा प्रणाली में बेहतर जवाबदेही, सुदृढ़ संस्थागत सुधारों और पारदर्शिता की व्यापक मांग को सार्वजनिक बनाना लक्ष्य है।