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दिल्ली: स्वास्थ्य विभाग में दवा एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुए 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवा एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुए 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच अब शीर्ष प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, 100 से अधिक डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। इनमें घोटाले के दौरान स्वास्थ्य विभाग में अहम पदों पर तैनात कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। बताया जा रहा कि घोटाला पूरी तरह से कमीशनखोरी से जुड़ा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों व निजी लोगों को फायदा पहुंचाया गया।

सूत्रों के अनुसार, एसीबी इस मामले की दो स्तरों पर जांच कर रही है। पहले स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक निर्णयों, खरीद संबंधी मंजूरियों और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस), डॉक्टरों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल, तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब जांच और तेज होगी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि खरीद प्रस्तावों की मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी अनुमोदन और वित्तीय स्वीकृति के विभिन्न स्तरों पर किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही। सूत्रों का कहना है कि घोटाले के दौरान स्वास्थ्य विभाग में तैनात कम से कम पांच से सात आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

अस्पतालों से भेजी गई मांग से लेकर गायब फाइलों तक खंगाल रही एसीबी…जांच एजेंसियों का फोकस केवल टेंडर प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) को भेजी गई दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामग्री की मांग का सीपीए की ओर से की गई वास्तविक खरीद से बारीकी से मिलान किया जा रहा है। एजेंसियां संबंधित अस्पतालों के मांग पत्र, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और खरीद फाइलों का भी मिलान कर रही हैं। जांच में कई महत्वपूर्ण खरीद से जुड़े दस्तावेज और मूल फाइलें गायब मिली हैं। गिरफ्तार पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल, पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा से पूछताछ में इन्हीं पहलुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जांच एजेंसी गायब रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, भुगतान संबंधी दस्तावेज की कड़ियां तलाश रही है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )