सचिन अहिर ने शिंदे नेतृत्व वाली शिव सेना का दामन थामा, उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका
महाराष्ट्र की सियासत में एक अहम मोड़ आया है, जब शिव सेना (उद्धव ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य सचिन अहिर ने प्रमुख रूप से शिंदे नेतृत्व वाली शिव सेना का समर्थन किया। यह कदम उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सचिन अहिर ने इस फैसले के तुरंत बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरपर्सन पद के लिए शिंदे गुट के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के समक्ष यह प्रक्रिया पूरी हुई।
मुंबई में उद्धव ठाकरे के करीबी और संगठनात्मक नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अहिर के इस कदम से शिव सेना (उद्धव ठाकरे) को भीषण आघात लगा है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे शिंदे गुट की ‘ऑपरेशन टाइगर’ रणनीति का दूसरा चरण बता रहे हैं, जिसके तहत ठाकरे गुट के नेताओं को शामिल किया जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद कई सांसदों को शिंदे गुट में शामिल करने में सफलता मिलने के बाद अब वे विधायक और विधान परिषद सदस्यों पर फोकस कर रहे हैं।
सचिन अहिर ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1990 के दशक में वस्त्रमिल कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन नेता के रूप में शुरू की थी। वे 1999 में वर्ली से विधायक चुने गए और दो बार इस सीट को बरकरार रखा। बाद में उन्होंने 2019 के विधान सभा चुनावों में आदित्य ठाकरे के लिए इस सीट को खाली किया।
मुंबई की राजनीति में अहिर का प्रभाव और ठाकरे परिवार के साथ उनकी घनिष्ठता को देखते हुए उनकी शिंदे-led शिव सेना में शामिल होना बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। वे आदित्य ठाकरे के क्षेत्र में पार्टी स्थिति मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता थे।
हाल ही में शिंदे गुट के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि शिव सेना (उद्धव ठाकरे) के और भी कई विधायक उनके साथ जुड़ सकते हैं। यह राजनीतिक घटनाक्रम महाराष्ट्र की आगामी महत्वपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों से पहले दोनों शिव सेना गुटों के बीच प्रतिद्वंद्विता को और गहरा करेगा।