Report : ICN Network
Noida : मुख्य बातें:मुख्यमंत्री कार्यालय (IGRS पोर्टल) तक पहुंची शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग हुआ सक्रिय।
मरीज का आरोप: भर्ती के समय बताया 50-60 हजार का खर्च, डिस्चार्ज पर थमाया दोगुना बिल।
जांच में नियमों का उल्लंघन: दिल्ली के पंजीकृत डॉक्टर बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के कर रहे थे इलाज।
दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में शुमार नोएडा सेक्टर-50 स्थित मेदांता हॉस्पिटल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक मरीज द्वारा इलाज के नाम पर मनमाना बिल वसूलने की शिकायत के बाद गौतमबुद्ध नगर के स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर कई बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है….
।मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई थी शिकायतजानकारी के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा निवासी प्रशांत कुमार ने गत 12 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर अस्पताल के खिलाफ मोर्चा खोला था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने अपने मरीज को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था, तब प्रबंधन की ओर से प्रतिदिन का अनुमानित खर्च 50,000 से 60,000 रुपये बताया गया था।

लेकिन, जब मरीज के डिस्चार्ज का समय आया तो अंतिम बिल बताई गई राशि से लगभग दोगुना कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क जोड़ने से पहले अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी और न ही बिल में इस भारी बढ़ोतरी का कोई ठोस कारण बताया।सीएमओ की जांच में खुले कई और राजमुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत अग्रसारित होने के बाद सीएमओ कार्यालय ने इस पूरे मामले की प्रशासनिक जांच शुरू की। शुरुआती जांच में न केवल बिलिंग की विसंगतियां सामने आईं, बल्कि अस्पताल के कामकाज और स्टाफिंग को लेकर भी कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं:स्टाफ रिकॉर्ड की कमी: अस्पताल ने हाल ही में कई नए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की थी, लेकिन इसकी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज सीएमओ कार्यालय को नहीं सौंपे गए।
अधिकारियों के मुताबिक, यह ‘द क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010’ का सीधा उल्लंघन है।रजिस्ट्रेशन का विवाद: जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में तैनात कुछ ऐसे चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे थे जो ‘दिल्ली मेडिकल काउंसिल’ (DMC) में पंजीकृत हैं, लेकिन उनके पास उत्तर प्रदेश में प्रैक्टिस करने का वैध स्थानीय पंजीकरण नहीं था।स्वास्थ्य विभाग की चेतावनीगौतमबुद्ध नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।
किसी भी अस्पताल को भर्ती के समय मरीज के परिजनों को संभावित खर्च का स्पष्ट ब्योरा देना अनिवार्य है। यदि इलाज के दौरान कोई अतिरिक्त खर्च आता है, तो परिजनों को समय रहते इसकी लिखित या स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिए।सीएमओ कार्यालय ने मेदांता अस्पताल के निदेशक को नोटिस का जवाब देने के लिए निश्चित समय सीमा दी है। विभाग का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन तय समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देता है, तो नियमानुसार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

