आदिवासियों का भारतीय सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक क्षेत्र में सतत संघर्ष और पहचान
भारत में आदिवासी समुदायों की उपस्थिति सामाजिक और राजनीतिक जीवन में गहराई से समाई हुई है। यह उपस्थिति उनके सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी अनूठी इच्छा और जीवनशक्ति का परिणाम है। दलित प्रश्न की भांति राजनीतिक चर्चा में अपेक्षाकृत कम ध्यान मिलने के बावजूद, आदिवासी समुदाय भी अत्यधिक उत्पीड़न और समस्याओं से जूझ रहे हैं, फिर भी सामाजिक विज्ञान में इन पर उतना अध्ययन नहीं हुआ है। मध्य भारत के भील, गोंड, संथाल, मुंडा, उरांव और अन्य प्रमुख आदिवासी समूह, जो भारत के कुल आदिवासी जनसंख्या का 80% से अधिक हिस्सा हैं, सदियों से अपने विशिष्ट और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के साथ जीवित हैं।
स्वतंत्रता के पश्चात स्थापित एक प्रमुख विद्वत्परंपरा, खासकर जीएस घुरिए के नेतृत्व में, आदिवासी संस्कृति को प्रारंभिक हिन्दू संस्कार या मानव विकास की एक संक्रमणकालीन अवस्था के रूप में देखती आई है, जो अंततः उन्नत हिन्दू संस्कृति में विलीन हो जाती है। इस मत के अनुसार, आदिवासी संस्कृति क्षणभंगुर है और हिन्दू संस्कृति के संपर्क में आते हुए इसके कुछ अवशेष कुछ समय तक देखे जा सकते हैं लेकिन अन्ततः वे भी हिन्दू संस्कृति में समाहित हो जाते हैं। यह सिद्धांत स्वतंत्रता के बाद भी बार-बार दोहराया गया है। दूसरी ओर, कुछ विद्वानों का यह भी मत है कि आदिवासी संस्कृतियां पहाड़ी और वन्य क्षेत्रों में विभिन्न राजवंशों और साम्राज्यों के साथ सहअस्तित्व बनाए हुए थीं, और वे “अपनी मर्जी से” यह सामाजिक व्यवस्था बनाए रखती थीं। आज भी विभिन्न आदिवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और पहचान को सजगता से संरक्षित कर रहे हैं। हालांकि राष्ट्र स्तर पर आदिवासियों के ऐसे योगदान और उनकी सांस्कृतिक प्रगाढ़ता को पर्याप्त सम्मान और समझ प्राप्त नहीं हुई है।
भारत के आदिवासी विषयक चिंतन में निरंतर बदलाव की आवश्यकता है ताकि उनकी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्वतंत्रता और सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्षों को सही मायनों में समझा जा सके। इससे न केवल उनकी समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सकेगा बल्कि उनके समृद्ध सांस्कृतिक योगदानों का भी उचित सम्मान किया जा सकेगा।
आदिवासियों की मजबूत सांस्कृतिक विरासत और उनकी समस्याओं की पारदर्शी समझ लोकतांत्रिक भारत के लिए आवश्यक है ताकि एक समावेशी और न्यायसंगत समाज का निर्माण किया जा सके।