जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए उमर अब्दुल्ला का केंद्र सरकार पर निशाना
जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने में विलंब करने के लिए कड़ी आलोचना की और रविवार को यह पूछा कि क्या उन्हें इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क करना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कहा, “हमारा धैर्य खत्म हो रहा है। पहले कहा गया कि विधानसभा में उठाने से राज्यhood नहीं मिलेगा, फिर जम्मू कश्मीर में प्रदर्शन करने से भी नहीं मिलेगा। अब कहा जा रहा है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने से भी नहीं मिलेगा। क्या मुझे व्हाइट हाउस जाकर डोनाल्ड ट्रंप से जम्मू और कश्मीर के राज्यhood के लिए अनुरोध करना चाहिए?”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि जब तक भारत सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक वे “नई दिल्ली में प्रदर्शन करते रहेंगे और अपनी मांग को राष्ट्रीय राजधानी के दरवाजे पर पहुंचाएंगे”। उनका यह भी कहना था कि अखिल भारतीय स्तर पर जम्मू कश्मीर को पुनः राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।
जानकारी के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद का मानसून सत्र शुरू होने के दिन दिल्ली में एक प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्यhood पुनर्स्थापित करने की मांग की जाएगी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।
5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था, जिसने जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया था, और तत्कालीन राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों — लद्दाख और जम्मू एवं कश्मीर — में विभाजित कर दिया गया था।
अब तक, राज्यhood की बहाली की मांग विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस संदर्भ में उमर अब्दुल्ला के बयान ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उमर अब्दुल्ला की इस टिप्पणी से जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।