पारंपरिक भारतीय घरेलू सज्जा में टीवी का स्थान सदियों से केंद्र बिंदु रहा है, जहाँ परिवार एक साथ बैठकर मनोरंजन करता था। लेकिन आधुनिक इंटीरियर डिज़ाइन के बढ़ते चलन के साथ, अब टीवी को बैठक कक्ष का मुख्य आकर्षण नहीं माना जा रहा है।
आधुनिक वास्तुकला और डिजाइन के सिद्धांतों के अनुसार, बैठक कक्ष को और अधिक बहुआयामी, सरल और सौंदर्यपूर्ण बनाया जा रहा है। इस बदलाव ने टीवी के महत्त्व को कम कर दिया है, जिससे कमरे के अन्य तत्वों को सजावट और डिज़ाइन में प्रमुखता मिलने लगी है।
घर के स्वामी अब ऐसी जगहों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो संवाद, आराम और पारिवारिक मेलजोल को बढ़ावा देते हैं। इस कारण टीवी को दीवार पर छुपा कर या पारंपरिक कैबिनेटों के अंदर रखा जा रहा है, ताकि वह कमरे की सुरुचिपूर्ण सजावट में बाधा न बने।
इसके अलावा, डिजिटल उपकरणों के उपयोग में भी बदलाव आया है। मोबाइल डिवाइस और लैपटॉप अधिक व्यक्तिगत मनोरंजन के साधन बन गए हैं, जिससे पारंपरिक टीवी की प्रासंगिकता में कमी आई है।
इस प्रकार, आधुनिक भारतीय घरों में बैठक कक्ष की डिजाइन बदल रही है, जो दर्शाता है कि टीवी अब सिर्फ मनोरंजन का स्रोत नहीं, बल्कि एक डिजाइन तत्व के रूप में भी देखा जाने लगा है। यह परिवर्तन न केवल सौंदर्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और तकनीकी बदलावों का भी प्रतिबिंब है।