भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय युद्ध के चरम समय, 9 मई 2025 को सीमा पार गोलाबारी में 24 वर्षीय अग्निवीर मूड मुरलीनायक शहीद हो गए। उनके शस्त्रागार में एक आंसू जैसी गाथा अब उनके माता-पिता की न्याय की लड़ाई बन चुकी है।
अंध-सांकेतिक दुश्मनी के बीच उनकी शहादत के बाद भी, उनके परिवार को अभी तक वे सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल सकी हैं जो अन्य सैनिक परिवारों को मिलती हैं। उनके माता-पिता, ज्योतिबाई और श्रीराम नायक, पिछले एक साल से केंद्र सरकार से जीवन भर की पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।
ज्योतिबाई नायक ने पहली बार मई महीने में दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर बेटे के नाम को देखा, जहाँ उनका नाम हाल ही में अंकित किया गया था। परन्तु, इस सम्मान की सूचना उनके पास उन्हें दिल्ली से कभी नहीं दी गई, बल्कि स्थानीय पत्रकारों द्वारा मिली। उस गर्व की अनुभूति के बावजूद, वे सरकारी यंत्रणा में किसी निष्पक्ष न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
देश के अन्य जवानों के विपरीत, जिनके परिवारों को केंद्र सरकार की तरफ से सारी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, इस परिवार को अब भी न्याय के दरवाजे पर खड़ा होना पड़ रहा है। ज्योतिबाई ने इस मुद्दे को लेकर बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है, ताकि उनके परिवार को वैधानिक एवं आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
यह मामला केवल एक शहीद के परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों की दास्तान है जो अपनी रक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, फिर भी जिनके हक़ा की लड़ाई वर्षो तक जारी रहती है। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इन परिवारों के आश्रितों के लिए समुचित सहायता सुनिश्चित करें और उनके साथ न्याय करें।