मुंबई में कूड़ा प्रबंधन की गंभीर चुनौती: बॉम्बे उच्च न्यायालय की कड़ी चेतावनी
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बीएमसी को मुंबई के कूड़ा निपटान स्थलों पर तत्काल रोकथाम के उपाय अपनाने हेतु सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने पुणे जिले के मोशी में हाल ही में हुई कूड़ा पहाड़ी धंसने वाली आपदा की तुलना करते हुए ऐसी किसी घटना को रोकने का आग्रह किया है।
न्यायपतियों गिरिश एस. कुलकर्णी और आरती साठे की पीठ ने कंजुर्मर्ग के डंपिंग ग्राउंड से संबंधित पर्यावरण और कूड़ा प्रबंधन पर दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए मुंबई में बढ़ती कूड़ा तलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर में स्थिति फिलहाल बहुत गंभीर है और मोशी जैसी घटना का दोहराव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मोशी में 8 जुलाई को भारी बारिश के बाद विशाल कूड़ा ढेर धंस गया था, जिससे नौ श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो गई थी। यह हादसा कूड़ा निपटान की सटीक देखभाल और नियमन की जरूरत को दर्शाता है।
न्यायालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के कड़ाई से पालन करने, अवैध डंपिंग रोकने और वैज्ञानिक कूड़ा निपटान की व्यवस्था मजबूत करने के लिए बीएमसी को निर्देशित किया। साथ ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को भी निगरानी कड़ी करने और नियम पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
पीठ ने दोनों निकायों को निर्देश दिया कि वे 15 दिनों के भीतर कूड़ा प्रबंधन सुधार और संभावित आपदा टालने के उपायों की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
यह निर्देश कंजुर्मर्ग के आसपास रहने वाले निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं के मद्देनजर दिए गए, जिन्होंने प्रदूषण, दुर्गंध, मीथेन उत्सर्जन और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और आठादिक मौसम में जब कूड़ा स्थिरता की स्थिति अहम हो जाती है, तब भी अधिकारियों को चूक नहीं करनी चाहिए। उन्हें हादसे का इंतजार किए बिना सक्रिय कार्रवाई करनी चाहिए।