एथनॉल ब्लेंडिंग यानी पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को लेकर चिंताओं के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को कहा कि देशभर में एथनॉल-मिले पेट्रोल (ई20) पर चल रहे 23 करोड़ से अधिक वाहनों में ई20 के कारण इंजन खराब होने का प्रमाणित साक्ष्य नहीं नहीं मिला है। गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने अभी तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिलाने पर कोई फैसला नहीं लिया है।
गोपी ने राज्यसभा में प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, देशभर में 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन साढ़े तीन साल से और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें ढाई साल से ई15-प्लस और ई19-ई20 फ्यूल पर चल रही हैं। इनमें ई20 से पहले बनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियां भी शामिल हैं। इन वाहनों में एथनॉल मिलाने की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन खराब होने का कोई भी प्रमाणित साक्ष्य नहीं मिला है।
उन्होंने चार-पहिया वाहन बनाने वाली बड़ी कंपनी के 2025-26 के सर्विस डाटा का हवाला दिया, जिसमें 2.84 करोड़ वाहन शामिल थे (जिनमें 1.5 करोड़ गैर ई20 सर्टिफाइड वाहन भी थे)। इस डाटा में फ्यूल से जुड़ा कोई नुकसान नहीं पाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि दो-पहिया वाहन बनाने वाली एक बड़ी कंपनी ने भी ऐसी ही जानकारी दी है।
गोपी ने कहा कि ‘चरणबद्ध, सोच-समझकर और साक्ष्यों के आधार पर एथनॉल ब्लेंडिंग का क्रियान्वयन किया गया है। एथनॉल ब्लेंडिंग 2013-14 में 1.53 प्रतिशत से धीरे-धीरे बढ़कर 2025-26 में 20 प्रतिशत हो गई है। 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया

