REPORT BY: RITURAJ
राजधानी दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च को लेकर सोमवार को माहौल गरमा गया। सीजेपी और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई, जबकि संसद की ओर बढ़ने की कोशिशों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सामाजिक कार्यकर्ताओं सोनम वांगचुक की अपील पर आयोजित ‘संसद मार्च’ ने सोमवार को उग्र रूप ले लिया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए। इस दौरान, सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजामों के बीच दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की भी खबरें सामने आई हैं।
संसद मार्च’ को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कड़े घेरेबंदी की थी। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जमा हुए प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए थे और मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी क्रम में, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की नोंकझोंक और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी हुईं। पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सीजेपी द्वारा आयोजित इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है और न ही दी गई है। नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत बिना अनुमति पांच या अधिक लोगों के जुलूस या प्रदर्शन पर पाबंदी है। पुलिस उपायुक्त ने जनता को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत प्रदर्शन से दूर रहें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पांच मेट्रो स्टेशनों अगले आदेश तक बंद
दिल्ली में सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रस्तावित संसद मार्च और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में जारी प्रदर्शन के मद्देनजर सोमवार को राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। एहतियातन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन को अगले आदेश तक बंद कर दिया था

अभिजीत दीपके ने खत्म की थी भूख हड़ताल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के कहने पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी। सोनम वांगचुक अभी सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं।
दीपके ने यह उपवास तब शुरू किया था जब 18 जुलाई को वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उनकी 21 दिन की भूख हड़ताल के कारण उन्हें चिकित्सा सहायता की ज़रूरत थी। इस बीच, CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रंका सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने के लिए निकले। पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक परीक्षा सुधारों की अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर जमा हुए। उधर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जंतर-मंतर पर अपनी 23 दिन की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने यह कदम विपक्षी विधायकों, नागरिक समाज के सदस्यों और जानी-मानी हस्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल की अपील पर उठाया।

प्रतिनिधिमंडल ने उनसे संसद और जन-अभियानों के ज़रिए आंदोलन जारी रखने का आग्रह किया था। भूख हड़ताल कर रहे AISA कार्यकर्ता नेहा, मनीष और आमीन ने शहर में हो रही बारिश के बीच अपना अनशन समाप्त किया।प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें मानसून सत्र के दौरान संसद के अंदर उठाई जाएंगी। राजनीतिक व जन-अभियानों के ज़रिए उन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सांसद मनोज झा और CPI(M) सांसद अमरा राम शामिल थे। CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और राजाराम सिंह भी मौजूद थे।
कई इलाके मे था नो-गो जोन; हाई अलर्ट
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए नई दिल्ली को 15 जोनों में बांटा गया है, जहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 25 बटालियनों सहित 5000 से अधिक जवान तैनात किए गए थे.
पुलिस ने पीएम आवास सहित संवेदनशील इलाकों को नो-गो जोन घोषित कर दिया है। अस्पतालों, मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख मार्गों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जंतर-मंतर क्षेत्र के आसपास तीन स्तर की सुरक्षा घेराबंदी की गई है, जिसमें बैरिकेडिंग, एंटी-सैबोटाज चेक और निरंतर पेट्रोलिंग शामिल है। साथ ही, लुटियंस दिल्ली से दूर इलाकों तक में बैरिकेडिंग की हुई थी

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि सीजेपी द्वारा आयोजित इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है और न ही दी गई थी। नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत बिना अनुमति पांच या अधिक लोगों के जुलूस या प्रदर्शन पर पाबंदी है। पुलिस उपायुक्त ने जनता को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत प्रदर्शन से दूर रहें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ट्रैफिक पर असर
संसद भवन, पीएम आवास, राजेंद्र प्रसाद रोड, अशोका रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए थे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है
संसद मार्च से पहले वांगचुक ने भेजा था संदेश
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा अगर…एक- सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की जिम्मेदारी ले, यादो- मैं और CJP की लीडरशिप संसद तक पहुंचें और वहां अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता हमें भरोसा दिलाएं कि वे अब संसद में यह मुद्दा उठाएंगे, या अगर मेरी सेहत या कोई और वजह इसकी इजाजत न दे, तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर ऊपर बताया गया भरोसा दिलाएं

गौरतलब है कि कि सोनम इस समय अपने स्वास्थ्यगत कारणों से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन उन्होंने तथा उनकी पत्नी ने इसे नजरबंदी बताया था। जबकि सरकार का कहना है कि पुलिस ने आंदोलनरत वांगचुक को अदालत के कहने पर जंतर मंतर से हटाया है। इस बीच आज संसद का मामसून सत्र शुरू हो रहा था और आंदलनकारियों की ओर से संसद मार्च प्रस्तावित है। पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी है। दूसरी ओर वांगचुक की पत्नी ने इस मार्च का नेतृत्व करने का संदेश कल ही दे दिया था। फिलहाल, नई दिल्ली इलाके में तनाव की स्थिति है। पुलिस अलर्ट है। अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी मुस्तैद हैं। जंचर मंतर की चारों ओर से बैरिकेडिंग कर दी गई है।
दिल्ली पुलिस गंभीर इनपुट मिले थे
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस गंभीर इनपुट मिले थे। दिल्ली पुलिस ने पूरी नई दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 लगा दी है, फिर इनपुट है कि प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास, इंडिया गेट या फिर महत्वपूर्ण जगहों पर जा सकते हैं।

हालांकि ये स्पष्ट है कि दिल्ली पुलिस किसी टकराव के मूड में नहीं थे। ऐसे में प्रदर्शनस्थल के आसपास किसी भी पुलिसकर्मी को लाठी आदि न रखने के सख्त आदेश दिए गए थे। सीजेपी के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस में रविवार दोपहर बाद ब्रीफिंग की थी। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा में 22 डीसीपी और आठ ज्वाइंट सीपी व एडिशन सीपी को सुरक्षा की कमान दी गई थी
समर्थन में अन्ना हजारे भी आए थे
सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की खबर ने इस आंदोलन को और धार दे दी थी । उनकी तबीयत बिगड़ने की जैसे ही सूचना फैली, दिल्ली के जंतर-मंतर पर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। कुछ ही घंटों में धरना स्थल छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भर गया था । उनके समर्थन में अन्ना हजारे भी सामने आए थे

30 सेकंड में बदला था जंतर मंतर का माहौल
जंतर मंतर में शनिवार सुबह शांतिपूर्वक बैठे थे, नारे लगा रहे थे और अपनी बात रख रहे थे। तभी अचानक माहौल बदल गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस आई और महज 30 सेकंड के अंदर सोनम वांगचुक को अपने साथ ले गई थी.
जंतर मंतर पर मौजूद लोगों का कहना है कि जैसे ही उन्हें लगा कि पुलिस वांगचुक को ले जाने वाली है, सभी लोग उनकी ओर दौड़ पड़े। किसी ने उनका हाथ पकड़ने की कोशिश की, तो किसी ने पुलिस से रुकने की अपील की। महिलाओं और छात्रों ने मिलकर उनके चारों ओर घेरा बना लिया, ताकि पुलिस उन्हें अपने साथ न ले जा सके। लेकिन यह कोशिश ज्यादा देर तक नहीं चल सकी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कुछ ही पलों में पुलिस वांगचुक को अपने साथ ले गई थी.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वांगचुक को हिरासत में लेने के दौरान वहां काफी धक्का-मुक्की हुई। लोगों के अनुसार, जब वह पुलिस की कार्रवाई का वीडियो बनाने लगे तो कुछ पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। कई प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए, जबकि कुछ लोगों को पीछे धकेल दिया गया।
पुलिस ने छोड़े थे आंसू गैस के गोले, पुलिस कमिश्नर पहुंचे संसद मार्ग थाना, हालात का लिया था जायजा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार को दोपहर में संसद भवन तक पहुंच गया। मानसून सत्र के पहले दिन हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में मुख्य दरवाजे को बंद किया। वहीं, प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस छोड़ने के साथ लाठी चार्ज भी करना पड़ा। जानकारी के अनुसार करीब 20 साल बाद किसी मार्च को संसद तक पहुंचने से दिल्ली पुलिस नहीं रोक पाई। इसे संसद भवन की सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है।दिल्ली पुलिस के सारे सुरक्षा इंतजाम सोमवार को तब नाकाम साबित हुए, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च हकीकत में संसद भवन के पास तक पहुंच गया था । कई साल से पुलिस सारे संसद मार्च को संसद मार्ग थाने के पास रोक लेती थी। इससे पहले 2004-05 में समाजवादी पार्टी को संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था, तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। उस समय नई दिल्ली जिले के डीसीपी मनोज लाल थे।सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले चलाए थे । मार्च के नजदीक आने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा कर्मियों को दौड़ लगानी पड़ी। इसके बाद वह संसद का गेट बंद कर दिया। संसद के अंदर सुरक्षा काफी कड़ी की गई है। जवानों ने कई स्तर का सुरक्षा घेरा बना रखा है। संसद के मानसून सत्र की सोमवार को ही शुरुआत हुई है। सदन में पेपर लीक और राम मंदिर से दान चोरी के मसले पर विपक्ष के लगातार हंगामे की वजह से लोकसभा और राज्यसभा मंगलवार के लिए स्थगित कर दी गई है।


संसद भवन के सामने की सड़क पर आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद अफरातफरी के बीच भाग रहे लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रहा है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार खुद संसद मार्ग थाना पहुंचकर हालात की निगरानी की। इस दौरान पुलिस की पूरी कोशिश प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की है। संसद भवन का इलाका दोपहर बाद खाली करवा लिया गया है। इसके बाद वहां के हालात सामान्य हुए। लेकिन वहां से हटने के बाद प्रदर्शनकारी इससे लगी दूसरी सड़कों पर फैल गए थे। देर शाम तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच रस्साकशी चलती रही।

करीब 110 छात्रों और 40 पुलिसकर्मियों को घायल अवस्था में उपचार के लिए लाया गया था
जंतर-मंतर पर सोमवार को संसद मार्च में हुए घायल छात्रों और पुलिसकर्मियों का अलग-अलग अस्पताल में उपचार जारी है। इसमें किसी छात्र की हाथ-पैर की हड्डी टूट गई है तो किसी को सिर में चोट आई है। आंख में चोट लगने की घटना भी शामिल है। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को भी सिर-हाथ में चोट लगी है। जबकि एक छात्रा की हालत गंभीर बनी हुई है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के एक सूत्र ने बताया कि करीब 110 छात्रों और 40 पुलिसकर्मियों को घायल अवस्था में उपचार के लिए लाया गया था। हालांकि यह औपचारिक आंकड़ा नहीं है। सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, न्यूरोसर्जरी और मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की टीम ने घायलों का उपचार किया है। ज्यादातर चोट डंडे से लगने वाली थी। जिसमें सिर फटने, आंख के पास चोट लगने, डंडे की मार से कमर, पैर और हाथ पर चोट के निशान थे। कुछ को फ्रैक्चर भी हुआ था। कुछ मामलों में टांके लगाने की नौबत आई। गले पर भी चोट के निशान देखने को मिले थे।

घायलों में एक छात्रा की हालत गंभीर जरूर है। लेकिन खतरे से बाहर है। छात्रा को सर्जरी विभाग की टीम की देखरेख में आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। डॉक्टरों की टीम बेहतर उपचार देने में जुटे हैं। वहीं छात्रा का नाम साक्षी बताया जा रहा है। उत्तम नगर की रहने वाली है। छात्रा के परिजन भी अस्पताल में पहुंचे हुए थे। बता दें कि सोमवार को अस्पताल की ओर से घायलों के संबंध में शाम सात बजे तक 65 मेडिको लीगल केस (एमएलसी) सर्जरी विभाग में रिपोर्ट होने के बारे में जानकारी साझा की गई थी। हालांकि अस्पताल में अब कितने भर्ती हैं उसको लेकर आरएमएल अस्पताल की ओर से कोई जानकारी साझा नहीं की गई।
अन्य थानों में सीजेपी और किसान संगठनों के खिलाफ दर्ज की गईं एफआईआर
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई को आयोजित संसद चलो मार्च के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ समेत अन्य मामलों पर दिल्ली पुलिस ने अब तक छह प्राथमिकी दर्ज की हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया कि ये प्राथमिकी संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और अन्य थानों में दर्ज की गई हैं। ये मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), शस्त्र कानून और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत दर्ज किए गए हैं।दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक प्राथमिकी कनॉट प्लेस स्थित रीगल सिनेमा के पास हुई हिंसा और पथराव के संबंध में दर्ज की गई है, जबकि अन्य मामले गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने, संसद सत्र के दौरान बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाने व हिंसा के पीछे कथित साजिश से जुड़े हैं। अन्य मारपीट, कानून अपने हाथ में लेने और अन्य संबंधित अपराधों के संबंध में दर्ज की गई हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी बीएनएस की धारा 223(बी) (कानूनी आदेशों की अवज्ञा), धारा 221 (लोक सेवक को उसके कर्तव्यों के पालन में बाधा डालना), धारा 132 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 121(1) (गैर-कानूनी सभा), धारा 189(3), 190, 191(2), 191(3) और 192 (गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने, दंगा करने और हिंसा से संबंधित), धारा 324(5) (शरारत), 109(1) (हत्या की कोशिश), 125 (लोगों की जान की खतरे में डालना) और 3(5) (सामान्य आशय से संबंधित) और धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज की गई है। प्राथमिकी में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है।
लाठीचार्ज और उसके बाद दर्ज की गईं एफआईआर पर आम आदमी पार्टी ने छात्रों को समर्थन दिया
जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और उसके बाद दर्ज की गईं एफआईआर पर आम आदमी पार्टी ने छात्रों को समर्थन दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर छात्रों के साथ बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज के शिकार छात्रों के साथ आप पूरी मजबूती से खड़ी है।केजरीवाल ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर आंदोलनकारियों को अपना समर्थन दिया। उन्होंने छात्रों को आह्वान करते हुए कहा कि इस लड़ाई में वह पूरी तरह उनके साथ है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। बहुत से युवाओं को पुलिस ने बिना एफआईआर के हिरासत में ले रखा है। उन्होंने कहा कि आप इन युवाओं को लीगल और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराएगा। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 8588833548 जारी किया गया है। केजरीवाल ने कहा कि इस नंबर पर कॉल या मैसेज करते ही ‘आप’ की टीम तुरंत मदद करेगी। जरूरत पड़ने पर देश के बड़े अधिवक्ता भी उपलब्ध कराए जाएंगे।प्रेस वार्ता में उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों पर बर्बरता का आरोप केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाया। उन्होंने पीएम की तुलना जलियांवाला बाग के जनरल डायर से की।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को हिरासत में लिया
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मंगलवार को कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसद अचानक प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।

कांग्रेस नेताओं ने छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का विरोध करते हुए नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।राहुल गांधी को हिरासत में लेने के दौरान वह सड़क पर ही लेट गए। इसी दौरान उन्होंने मीडिया से कहा, ‘लोकतंत्र खत्म हो गया है।’उधर, अखिलेश यादव का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिल्ली पुलिस उन्हें बस में बैठाकर ले जाती दिखाई दे रही है। इस दौरान अखिलेश यादव पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई देते हैं, ‘पुलिस भैया, कहां लेकर जा रहे हो?’

इस पूरे घटनाक्रम पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, ‘कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांगने के लिए हम उनके घर तक पैदल मार्च करके गए। सरकार न तो कोई जवाबदेही लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
‘प्रियंका गांधी को भी हिरासत में लिया गया
दिल्ली पुलिस ने वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी को भी हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए जाने के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार डरपोक है। वो डरती है। हम उनसे नहीं डरते, वो हमसे डरते हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने अलग-अलग थानों से गिरफ्तार किए 70 से 80 लोगों को छुड़वाया
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मंगलवार को अस्पताल में छात्रों से मिले और हिरासत में लिए गए युवाओं को थानों से छुड़ाने पहुंचे। केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने अलग-अलग थानों से गिरफ्तार किए 70 से 80 लोगों को छुड़वाया। इसके बाद उन्होंने जंतर मंतर जाकर धरने पर बैठे युवाओं से मुलाकात की।
इसके बाद केजरीवाल मंदिर मार्ग थाने और संसद मार्ग थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंदिर मार्ग थाने में सोमवार से लगभग 11 बच्चों को हिरासत में रखा हुआ है। उन्होंने पुलिस से युवाओं को हिरासत में रखे जाने, छोड़ने या उन पर एफआईआर करके गिरफ्तार करने की बात पूछी। पुलिस ने उनसे दो घंटे में जानकारी देने को कहा.
अब आगे देखना ये है की क्या और कब सरकार अपनी चुप्पी इस मामले तोड़ती है

