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ग़ाज़ियाबाद: जस्ट डायल पर फर्जी कंपनी बनाकर कई राज्यों में ठगी

गाजियाबाद में एक सिम से शुरू हुई जांच ने देश के कई राज्यों में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा कर दिया। मुरादनगर पुलिस और स्वाट टीम ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी की प्रोफाइल बनाकर लोगों को वाहन उपलब्ध कराने का झांसा देता था और एडवांस राशि लेकर मोबाइल फोन बंद कर देता था। पुलिस ने गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके चार साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है

पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ठगों का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। पुलिस को गिरोह से जुड़े 64 बैंक खातों की जानकारी मिली है। आशंका है कि आरोपियों ने करीब एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। पुलिस अन्य राज्यों में हुई वारदातों की जानकारी जुटा रही है।डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि साइबर ठगी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुरादनगर पुलिस और स्वाट टीम को गिरोह की तलाश में लगाया गया था। सिम व बैंक खातों की जांच करते हुए टीम बदायूं में मोबाइल फोन की दुकान चलाने वाले दशमेश तक पहुंची और उससे पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ

बुधवार को चार शातिर ठगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें हजरतपुर (बदायूं) निवासी दशमेश, अमृतनगर (फर्रुखाबाद) निवासी सौरभ सिंह व अभिषेक अवस्थी और मितौली (लखीमपुर खीरी) निवासी राकेश सिंह शामिल हैं। गिरोह में शामिल बदायूं निवासी विकास, अजय, सुरजीत और विजय फरार हैं। सभी आरोपी 12वीं पास हैं। इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक कीपैड मोबाइल फोन और मोबाइल फोन खरीद के चार बिल बरामद हुए हैं।कम कीमत में वाहन उपलब्ध कराने का देते थे झांसापुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सौरभ फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी तैयार करता था। उसने गुजरात और महाराष्ट्र के नाम से कंपनियां बनाई थीं और उन्हें जस्ट डायल पर सूचीबद्ध कराया था। सामान भेजने के लिए संपर्क करने वाले ग्राहकों को कम कीमत में वाहन उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता था। ग्राहक भरोसा कर लेते थे और बुकिंग के नाम पर 10 से 50 प्रतिशत तक एडवांस राशि ऑनलाइन जमा कर देते थे। रकम मिलते ही आरोपी मोबाइल फोन नंबर बंद कर देते थे।ग्रामीणों की पहचान बनी ठगी का हथियारजांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी सिम और बैंक खातों के सहारे पूरा नेटवर्क चला रहा था। आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कम कीमत में अधिक रिचार्ज और गिफ्ट का लालच देकर उनके नाम पर सिम निकलवाते थे। लोगों की आईडी का इस्तेमाल कर दो से तीन सिम जारी करा लिए जाते थे। इन्हीं नंबरों से ग्राहकों से संपर्क किया जाता था और ठगी की जाती थी। आरोपी दशमेश सिम उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, उसके पास नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) बैंकिंग सेवा की आईडी भी थी। इसी के जरिये वह ग्रामीणों को गुमराह कर बैंक खाते खुलवाता था। एक खाता खुलवाने के बदले उसे चार हजार रुपये मिलते थे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )