इस कदम का किसान संगठनों, विपक्षी दलों और कई एनडीए सहयोगियों ने व्यापक विरोध किया, जिन्होंने तर्क दिया कि ये बदलाव मौजूदा सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हैं और जन-विरोधी हैं। सरकार ने अंततः प्रस्ताव को समाप्त होने दिया। मोदी ने घोषणा की कि मौजूदा कानून अपरिवर्तित रहेगा।