दिल्ली में निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले 2.7 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिकों और उनके पात्र आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सुविधा का दायरा बढ़ने वाला है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली बिल्डिंग वर्कर्स हेल्थ स्कीम को मंजूरी दे दी है।
योजना के तहत एक लाभार्थी को एक साल में अधिकतम 2 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। वहीं, पूरे परिवार के लिए यह सीमा सालाना 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। स्वास्थ्य सुविधा में ओपीडी, अस्पताल में भर्ती, मेडिकल जांच, दवाएं, इमरजेंसी ट्रीटमेंट और मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल हैं।
श्रमिक और पात्र आश्रित होंगे योजना के लाभार्थी
दिल्ली बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के साथ 2.7 लाख से ज्यादा निर्माण श्रमिक फिलहाल सक्रिय सदस्य के तौर पर पंजीकृत हैं। इन्हीं श्रमिकों और उनके पात्र आश्रित परिवार के सदस्यों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
योजना के तहत प्रत्येक श्रमिक और उसके पात्र जीवनसाथी के स्वास्थ्य की सालाना जांच भी कराई जाएगी। व्यक्तिगत लाभार्थी के इलाज की वार्षिक सीमा 2 लाख रुपये रखी गई है, जबकि परिवार के सभी सदस्यों के लिए यह सीमा मिलाकर 10 लाख रुपये प्रति वर्ष होगी।
सूचीबद्ध अस्पतालों में CGHS दरों पर इलाज
योजना में शामिल अस्पतालों के नेटवर्क के जरिए लाभार्थियों को CGHS दरों पर कैशलेस उपचार मिलेगा। डॉक्टर से परामर्श लेने से लेकर मेडिकल जांच, दवाइयों और अस्पताल में भर्ती होने तक की सुविधा इसमें शामिल होगी।
इसके अलावा योजना में आपातकालीन चिकित्सा, काम से जुड़ी बीमारियां, पुरानी बीमारियां, विशेषज्ञों से इलाज, मातृत्व स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं को भी कवर किया गया है।
निर्माण स्थल पर हादसे में तुरंत उपचार की सुविधा
काम के दौरान निर्माण स्थल पर दुर्घटना होने या अचानक मेडिकल इमरजेंसी आने पर श्रमिक को सूचीबद्ध अस्पताल तलाशने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसी स्थिति में नजदीकी गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में भी इलाज कराया जा सकेगा।
इस तरह के अस्पताल को उपचार की सीमित अवधि के लिए अस्थायी रूप से सूचीबद्ध माना जाएगा। निर्माण कार्य में दुर्घटना की आशंका को देखते हुए यह सुविधा श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि ऐसी स्थिति में समय पर इलाज मिलना जरूरी है।
कार्यस्थलों पर पहुंचेंगी मोबाइल मेडिकल यूनिट
श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए योजना के अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट भी संचालित की जाएंगी। ये यूनिट कार्यस्थलों से श्रमिकों को सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंचाने, उनकी स्वास्थ्य जांच करने और योजना के बारे में जानकारी देने में मदद करेंगी।
लाभार्थियों का रिकॉर्ड, उनके इलाज का इतिहास और मेडिकल क्लेम से जुड़ी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन संभाली जाएगी।
तीन साल के लिए नियुक्त होगी परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी
योजना के संचालन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञता रखने वाली परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए गुणवत्ता और लागत आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
एजेंसी की शुरुआती अवधि तीन साल होगी। प्रदर्शन की समीक्षा के बाद इसके कार्यकाल को एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। योजना को इससे पहले मुख्यमंत्री और दिल्ली कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।
वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्येक दावे की थर्ड पार्टी से जांच कराई जाएगी। बोर्ड को जरूरत पड़ने पर अन्य जांच कराने का अधिकार भी होगा। जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान जारी किया जाएगा।
योजना की निगरानी के लिए बिल्डिंग वर्कर्स हेल्थ कमेटी का भी गठन किया गया है। इसमें श्रम एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे।

