दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ट्रैफिक और कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने प्रदर्शन आयोजित करने के नियमों को लागू करने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार से उसका पक्ष रखने को कहा है।
मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से मामले में जानकारी लेकर जवाब देने को कहा। अदालत में अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के कारण आम लोगों, व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को परेशानी होती है। कई बार सड़कों पर जाम लग जाता है और कारोबार भी प्रभावित होता है।
याचिकाओं में मांग की गई है कि प्रदर्शनों के लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन कराया जाए। साथ ही, प्रदर्शन निर्धारित स्थानों पर हों, ताकि लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर कम से कम असर पड़े।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े कुछ मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस पर पीठ ने याचिकाकर्ताओं से उन मामलों की जानकारी और संबंधित याचिकाओं की प्रतियां पेश करने को कहा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे मुद्दे पर विचार करते समय सावधानी बरतना चाहती है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा है। शुक्रवार को होने वाली अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को बनाए रखते हुए ट्रैफिक, आम लोगों की सुविधा और कारोबार को प्रभावित होने से कैसे बचाया जाए।

