नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने निजी बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों की जांच की जा रही है। इस अभियान में 9 से 11 अक्टूबर तक 47 बसों को जब्त किया गया, जबकि 76 बसों के चालान काटे गए।
परिवहन विभाग ने दिल्ली से नोएडा होकर चलने वाली एक हजार से अधिक निजी बसों का रिकॉर्ड तैयार किया है। जिन बसों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां मिली हैं, उन्हें विशेष निगरानी में रखा जाएगा। अब किसी बस ऑपरेटर की एक गाड़ी में गड़बड़ी मिलने पर उसके बेड़े की दूसरी बसों की भी जांच की जा सकती है।
जांच के दौरान बसों के परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और जरूरी सुरक्षा उपकरणों पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें आग बुझाने वाला यंत्र और इमरजेंसी गेट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
परिवहन विभाग का कहना है कि जब्त की गई बसों को केवल जुर्माना भरने के आधार पर नहीं छोड़ा जाएगा। पहले उनकी तकनीकी जांच होगी। सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली बसों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण निलंबित किया जा सकता है।
निजी बसों से जुड़ी गंभीर घटनाओं के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जांच तेज की गई है। विभाग का उद्देश्य ऐसी बसों को सड़कों पर चलने से रोकना है, जिनसे यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बसों को रोककर यात्रियों को चढ़ाने और उतारने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद कुछ बस संचालक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। परिवहन विभाग ऐसे मामलों पर भी नजर रख रहा है।
इस अभियान के जरिए प्रशासन की कोशिश है कि निजी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मिले और नियमों के खिलाफ चलने वाले वाहनों पर रोक लगाई जा सके।

