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अबू सलेम की पैरोल पर महाराष्ट्र सरकार का कड़ा ऐतराज़, बोली– ‘रिहाई से दोबारा फरार होने का खतरा’

महाराष्ट्र सरकार ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को पैरोल देने का विरोध करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट को आगाह किया है कि उसकी अस्थायी रिहाई से उसके फिर से फरार होने की आशंका है। सरकार का कहना है कि ऐसा होने पर भारत और पुर्तगाल के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और श्याम चंदक की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में राज्य सरकार ने सलेम को अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर बताते हुए कहा कि अधिकतम दो दिन की आपातकालीन पैरोल पर ही विचार किया जा सकता है। जेल महानिरीक्षक सुहास वारके ने भी आशंका जताई कि सलेम 1993 की तरह एक बार फिर फरार हो सकता है, जो समाज की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए गंभीर खतरा होगा।
सरकार ने यह भी याद दिलाया कि सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत लाया गया था और उस दौरान दिए गए आश्वासनों का पालन करना भारत की जिम्मेदारी है। यदि वह पैरोल पर बाहर आकर फरार होता है, तो इससे बड़ा कूटनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।
इस मामले में CBI ने भी पैरोल का विरोध किया है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई है, हालांकि अदालत ने एजेंसी से इस पर विस्तृत जानकारी मांगी है। सलेम ने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी के निधन के बाद 14 दिन की पैरोल की मांग की थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस की रिपोर्ट में आजमगढ़ के सरायमीर इलाके को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बताते हुए सलेम की मौजूदगी से शांति भंग होने की आशंका जताई गई थी, जिसके आधार पर जेल अधिकारियों ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। अबू सलेम को 1993 मुंबई बम धमाकों सहित तीन मामलों में आजीवन कारावास और अन्य मामलों में 25 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को तय की |

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)