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MahaKumbh Mela Stampede: अखिलेश यादव ने महाकुंभ में भगदड़ पर योगी सरकार से 5 महत्वपूर्ण अपील की

Report By : ICN Network
कुछ आई विटनेस ने भगदड़ के हालात भी बयां किए. एक ने न्‍यूज18 इंडिया के कैमरे पर कहा कि ‘एक ही रूट से लोग आ भी रहे थे और जा भी रहे थे, तो दिक्कतें आएंगी हीं. हम लोग भी लाइन में लगे हुए थे और पता लगा कि धक्का मुक्की हो गई है

महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दिन मंगलवार और बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए जुटे थे। इस दौरान अचानक भगदड़ मच गई, जिससे स्थिति काफी बिगड़ गई। कई लोग घायल हो गए और इलाज के लिए कुंभ मेला क्षेत्र के अस्पतालों में भेजे गए। गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को प्रयागराज के विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया। हालांकि, घटना में कितने लोगों की मौत हुई, इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। घटना के बाद स्थिति सामान्य हो गई, लेकिन भगदड़ में बचे हुए लोग अपनी दर्दनाक कहानियां मीडिया के कैमरों पर बता रहे थे।

मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे। सबसे अधिक भीड़ संगम तट पर थी। बताया जा रहा है कि जब श्रद्धालु एक जगह से गुजर रहे थे, अचानक बैरिकेड टूट गए, जिसके कारण भगदड़ मच गई और लोग एक दूसरे पर चढ़ गए। इसके चलते कई लोग घायल हो गए, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हुए। प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस भेजी और घायलों को मेला क्षेत्र के अस्पताल में भेजा। एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया था, जिससे घायलों को जल्दी अस्पताल पहुंचाया जा सके। गंभीर रूप से घायल लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया

भगदड़ के बाद एक और बड़ी समस्या सामने आई, जो थी अपनों से बिछड़ने की। कई लोग इस घटना में अपने परिजनों से बिछड़ गए थे, जिनमें विशेष रूप से बुजुर्गों की संख्या अधिक थी। एक शख्स ने बताया कि रात करीब एक बजे संगम के किनारे धक्का-मुक्की हुई, जिसके कारण उनके 65 वर्षीय बहनोई बिछड़ गए और अभी तक उनका पता नहीं चल पाया है। एक महिला ने रोते हुए कहा कि वह भीड़ के कारण अपने बच्चों से बिछड़ गई है और अब उसके पास घर लौटने के लिए भी पैसे नहीं हैं। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि भगदड़ के दौरान वह भी अपनों से बिछड़ गईं और भोजन भी नहीं खाया है।

घटनास्थल पर मौजूद एक चश्मदीद गवाह ने बताया कि पुलिस की लापरवाही के कारण भगदड़ मची। जब लोग आराम कर रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें डंडे से मारकर जगाया, जिससे लोग असंतुलित हो गए और भगदड़ मच गई। कई लोग इस हादसे में दब गए और मारे गए

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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