इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक युवक को हिरासत में लेने के मामले में नोएडा पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत के सामने ऐसा मामला आया, जिसमें पुलिस पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही युवक को अपने कब्जे में लेने का आरोप लगा। कोर्ट ने इस कार्रवाई को लेकर पुलिस से गंभीर सवाल किए।
मामला गौतमबुद्ध नगर के फेज-2 थाना क्षेत्र का है। दीपक नाम के युवक ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका आरोप था कि पुलिस ने उसे उस समय पकड़ लिया था, जब तक उसके खिलाफ कोई FIR दर्ज ही नहीं की गई थी।
सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, दीपक को 23 अगस्त को शाम करीब 7:34 बजे हिरासत में लिया गया था। वहीं, उसके खिलाफ FIR उसी रात करीब 9:39 बजे दर्ज की गई। यानी पुलिस रिकॉर्ड के हिसाब से FIR से लगभग दो घंटे पहले ही युवक पुलिस के कब्जे में पहुंच चुका था।
इस घटनाक्रम पर अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान बेंच ने अधिकारियों की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति बेहद गंभीर है और इस तरह की कार्रवाई पर शर्म आनी चाहिए।
अदालत ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति को पहले हिरासत में लेकर बाद में गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया दिखाना स्वीकार्य नहीं है। पुलिस के लिए जरूरी है कि हिरासत या गिरफ्तारी से जुड़े हर कदम का रिकॉर्ड कानून के अनुसार रखा जाए।
कोर्ट ने दीपक को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पुलिस की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच किए जाने की जरूरत बताई गई। अदालत ने दोहराया कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत आजादी और उसके संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी से यह संदेश साफ है कि पुलिस कार्रवाई में कानूनी नियमों का पालन जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेते समय उसकी स्वतंत्रता और अधिकारों का ध्यान रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।

