मुंबई में BEST ने जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच लापरवाही और असावधानी से वाहन चलाने वाले 898 ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 789 ड्राइवर वेट-लीज सिस्टम के तहत संचालित बसें चला रहे थे।
वेट-लीज बसों से जुड़े कई हादसों के बाद BEST ने यह कदम उठाया। फिलहाल BEST के बेड़े में 2,850 बसें संचालित हो रही हैं। इनमें केवल 249 बसें BEST की अपनी हैं, जबकि 2,601 बसें निजी कंपनियां वेट-लीज समझौते के तहत चला रही हैं। यानी कुल बस बेड़े का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा इसी व्यवस्था के अंतर्गत आता है।
BEST के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मई 2026 के बीच वेट-लीज बसों से जुड़ी 249 घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में 10 लोगों की मौत हुई और 46 लोग घायल हुए। डिपो के आंकड़ों में सांताक्रूज सबसे आगे रहा, जहां 324 ड्राइवरों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा माहिम में 50, माजस में 46, कोलाबा में 43, गोरेगांव में 31 और धारावी में 23 मामले सामने आए।
गोरेगांव ईस्ट में फिर हुआ बस हादसा
सोमवार को गोरेगांव ईस्ट में वेट-लीज बस से जुड़ी एक और दुर्घटना हुई। डिंडोशी डिपो से भाईंदर जा रही बस ने पहले एक कार को टक्कर मारी और फिर पास के खंभे से जा भिड़ी। हादसे में दो लोग घायल हो गए। निजी कार के चालक की शिकायत के बाद बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
BEST अधिकारियों के अनुसार, तेज गति से वाहन चलाने, लापरवाही और अन्य गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की शिकायतों व रिपोर्ट के आधार पर ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कुछ मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित वेट-लीज ऑपरेटरों के पास भी भेजा गया।
ड्राइवरों पर हुई अलग-अलग कार्रवाई
BEST ने बताया कि हर मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग तरह की कार्रवाई की गई। इसमें निलंबन, चेतावनी, सेंसर और विभागीय जांच जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। कुछ ड्राइवरों को एक दिन के लिए निलंबित किया गया, जबकि कुछ को चेतावनी या फटकार दी गई।
कुछ मामलों में वेट-लीज ऑपरेटरों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया। सांताक्रूज डिपो से जुड़े एक मामले में एक ऑपरेटर पर 9.72 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
ड्राइवरों को दी जा रही डिफेंसिव ड्राइविंग ट्रेनिंग
BEST की ओर से ड्राइवरों को सुरक्षित और डिफेंसिव ड्राइविंग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक बस चलाने वाले ड्राइवरों के लिए भी विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है।
BEST के एक अधिकारी के मुताबिक, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की जानकारी देने के लिए ड्राइवरों को पहले एक सप्ताह की क्लासरूम ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद तीन सप्ताह तक वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण कराया जाता है।

