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UP-गोंडा में भारत संकल्प यात्रा का हुआ कार्यक्रम, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने की शिरकत

यूपी के गोंडा में जहां विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत गोंडा के झंझरी ब्लॉक के इमरती विसेन ग्राम पंचायत में  भारत संकल्प यात्रा गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचकर पहुंचकर दीक्षित भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम का शुभारंभ किया ग्राम पंचायत में सभी विभागों के स्टॉल लगाए गए और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक किया गया प्रभारी मंत्री अनिल राजभर के साथ गोंडा के जिलाधिकारी सरकारी विभागों के लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया तो वहीं सरकार की 64 योजनाओं के लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी बांटा गय भाजपा मंत्री ने मां से संबोधित करते हुए सरकार की योजनाओं को गिनाया तो 2047 तक भारत को विकसित विकसित राष्ट्र बनाने की भी बात की उन्होंने यह भी कहा विपक्षी दल देश को विकसित होने में बढ़ा दे रहे हैं और हमारे देश के प्रधानमंत्री को अमर यदि शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन मोदी जी गरीबों के हित के लिए लगातार काम कर रहे है।

उनकी गली को भी सुन रहे हैं आयुष्मान कार्ड के तहत जहां गरीबों को 5 लाख के मुफ्त इलाज किया जा रहे हैं तो वहीं किसान समृद्धि योजना के तहत किसानों के खाते में हर साल 6000 रुपए भेजे जाते हैं जिससे किसान अपनी खेती किसानी कर रहे हैं 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हर हर सभी को एक साथ मिलकर काम करना होगा घर में बैठकर एक ही आदमी इतना बड़ा काम नहीं कर सकता।विकसित भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम के बाद प्रभारी मंत्री गोंडा के ट्रांसफर इंटर कॉलेज में मंडलीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया जहां पर खड़ी के विभिन्न उत्पाद लगाकर प्रदर्शनी लगाई गई कार्यक्रम के दौरान गोंडा की जिलाधिकारी नेहा शर्मा मुख्य विकास अधिकारी डॉ अरुण मौली और भाजपा के पदाधिकारी मौजूद है।भारत संकल्प यात्रा कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री अनिल राजभर के साथ गोंडा जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी और और भाजपा के पदाधिकारी ने श्रमदान करते हुए साफ सफाई भी कीग्राम पंचायत इमरती विसेन में आयोजित “विकसित भारत संकल्प यात्रा” कार्यक्रम में माननीय जनपद के प्रभारी मंत्री जी ने श्रमदान, बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम तथा विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन कर, योजनाओं से लाभान्वित लाभार्थियों को स्वीकृति प्राप्त पत्र वितरण के कार्यक्रम में उपस्थित जिलाधिकारी महोदया, मुख्य विकास अधिकारी महोदया एवं अन्य अधिकारीगण।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}