• Tue. Sep 22nd, 2026

India Core News | Read Latest Trending News..

आपका इंडिया आपकी न्यूज़

“60 करोड़ जमा होंगे, तभी विदेश यात्रा” — शिल्पा शेट्टी–राज कुंद्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट की दो टूक

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा को विदेश यात्रा के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। 60 करोड़ रुपये की कथित आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े केस में कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लंदन जाने की इजाजत तभी दी जाएगी, जब दंपति 60 करोड़ रुपये नकद जमा करें या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से इतनी ही राशि की बैंक गारंटी पेश करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन शर्तों के बिना जारी लुकआउट सर्कुलर हटाया नहीं जा सकता।

दरअसल, राज कुंद्रा के पिता की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने विदेश जाने की विशेष अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया कि कुंद्रा के पिता दुर्लभ आयरन-अमोनिया डेफिशिएंसी से पीड़ित हैं, जिसके चलते उन्हें आंतरिक रक्तस्राव और सांस लेने में गंभीर दिक्कतें हो रही हैं। डॉक्टरों ने उनके इलाज के लिए कैप्सूल एंडोस्कोपी या डबल-बैलून एंटरोस्कोपी जैसी उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया की सलाह दी है। इसी आधार पर दंपति ने 20 जनवरी 2026 से पहले लंदन जाने की अनुमति मांगी थी।

दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत में दलील दी कि यात्रा केवल चिकित्सकीय कारणों से जरूरी है, इसलिए 60 करोड़ रुपये की पूरी राशि जमा करने की शर्त व्यवहारिक नहीं है और कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कर दिया कि लुकआउट सर्कुलर हटाने के लिए सिर्फ दो ही विकल्प उपलब्ध हैं—पूरी राशि जमा करना या बैंक गारंटी देना।

यह मामला यहीं खत्म नहीं होता। इससे पहले शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने कथित 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने यह भी अनुरोध किया था कि अंतिम सुनवाई तक पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने या किसी दंडात्मक कार्रवाई से रोका जाए।

शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच दंपति ने उन्हें अपनी कंपनी ‘बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड’ में 60 करोड़ रुपये निवेश करने के लिए उकसाया, लेकिन बाद में उस धन का उपयोग निजी फायदे और लग्जरी खर्चों में किया गया। वहीं, दंपति का कहना है कि यह शिकायत झूठी और दुर्भावनापूर्ण है, जिसे केवल पैसा वसूलने के इरादे से दर्ज कराया गया है। उनका तर्क है कि निवेश में हुआ नुकसान व्यावसायिक जोखिम का हिस्सा है, न कि आपराधिक धोखाधड़ी।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह आदेश इस हाई-प्रोफाइल मामले को और गंभीर बनाता है और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायपालिका की सख्त रवैये को भी दर्शाता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)