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नोएडा: अधिक फर्जी और भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों को लेकर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (एआईआईए) को शिकायत भेजी

ByAnkshree

Dec 10, 2025

संस्थान ने चेतावनी देते हुए कहा कि विज्ञापन पर न करें विश्वास, पंजीकृत चिकित्सक से लें सलाह
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-24 स्थित डॉ. डीपी रस्तोगी केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान ने भ्रामक दावों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर भारत में चल रहे 200 से अधिक फर्जी और भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों को लेकर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (एआईआईए) को शिकायत भेजी है। इन विज्ञापनों में विभिन्न बीमारियों के पूरी तरह ठीक होने जैसे गारंटीड इलाज के दावे किए जा रहे थे, जो वैज्ञानिक रूप से सही नहीं पाए गए। संस्थान की ओर से मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि ये सभी विज्ञापन उत्तर भारत के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थे और लोगों को भ्रमित कर रहे थे। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई फार्मास्यूटिकल विजिलेंस प्रोग्राम, जो वर्ष 2018 में शुरू किया गया था के तहत की गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार निगरानी की जा रही है। संस्थान ने चेतावनी देते हुए कहा कि बीमारियों के गारंटीड इलाज का दावा करने वाले किसी भी विज्ञापन पर विश्वास न करें और किसी भी चिकित्सा पद्धति को अपनाने से पहले पंजीकृत चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर वार्ता में लेंगे हिस्सा
प्रभारी अधिकारी व वैज्ञानिक डॉ. शाजी कुमार ने बताया, डब्ल्यूएचओ की द्वितीय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर वार्ता भारत मंडपम में 17 से 19 नवंबर तक आयोजित होगी। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति निर्धारक, वैश्विक स्वास्थ्य नेता, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया, देशभर में संचालित केंद्रीय होम्योपैथिक संस्थान भी इसमें भाग लेंगे। वार्ता में संस्थानों की गई महत्वपूर्ण शोध को साझा किया जाएगा। उनका कहना है कि उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन रिसर्च का लाभ मिल सके।

सहायक निदेशक डॉ पंकज गुप्ता ने बताया, पिछले 18 वर्षों से रोगी देखभाल और होम्योपैथिक अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। यहां पर ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला सेवाएं, अल्ट्रासोनोग्राफी आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। ईएनटी, नेत्र रोग, जीवनशैली विकार, बांझपन और फिजियोथेरेपी जैसी विशेष क्लिनिक भी संचालित हैं। प्रतिवर्ष एक लाख रोगियों को उपचार मिल रहा है। इसमें साइनुसाइटिस, पीसीओएस, मूत्र मार्ग में संक्रमण, वृक्क पथरी, बवासीर, अवसाद समेत अनेक रोग शामिल हैं।
संस्थान का औषधि मानकीकरण विभाग विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से औषधीय पौधों और होम्योपैथिक औषधियों की गुणवत्ता, शुद्धता, प्रामाणिकता, सुरक्षा और प्रभावकारिता बढ़ाने के लिए समर्पित है। संस्थान में अत्याधुनिक एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और प्री-क्लिनिकल परीक्षणों के लिए पूर्ण रूप से कार्यात्मक पशु गृह उपलब्ध है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )