दिल्ली में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर अपने जाल में फंसा लिया। महिला से करीब 27 लाख रुपये की ठगी हो चुकी थी। हालांकि, महाराष्ट्र साइबर टीम की सतर्कता और दिल्ली पुलिस की समय पर कार्रवाई से महिला को आगे और पैसे गंवाने से बचा लिया गया।
महाराष्ट्र में ठगी की जांच के दौरान मिला सुराग
मामले की शुरुआत महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में करीब 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की जांच से हुई। जांच के दौरान साइबर टीम को एक संदिग्ध बैंक खाते में 14 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली। इसी ट्रांजैक्शन के आधार पर टीम ने आगे की जांच शुरू की।
बैंक खाते से दिल्ली की महिला तक पहुंची टीम
संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल करते हुए महाराष्ट्र साइबर टीम ने बैंक से जुड़ी जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि पैसे भेजने वाली महिला दिल्ली की रहने वाली है। इसके बाद टीम को आशंका हुई कि महिला भी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों का शिकार हो रही है।
दिल्ली पुलिस की मदद से बची महिला
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर टीम ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस ने महिला तक पहुंचकर समय रहते कार्रवाई की। इससे महिला को ठगों के जाल में और फंसने तथा अतिरिक्त पैसे गंवाने से बचा लिया गया।
क्या है डिजिटल अरेस्ट का स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या किसी सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
ऐसी ठगी से कैसे बचें?
- फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP और निजी विवरण किसी के साथ साझा न करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
ध्यान रखें कि भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ठगों की धमकियों से घबराने के बजाय सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें।

