दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लड़कियों ने अपनी चिंता खुलकर सामने रखी है। उनका सवाल है कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कब तक सिर्फ बातें होती रहेंगी और जमीन पर ठोस बदलाव कब दिखाई देगा?
लड़कियों ने समाज की उस सोच पर भी सवाल उठाए, जिसमें अक्सर महिलाओं के कपड़े, उनके बाहर निकलने या देर रात घर लौटने को लेकर सवाल किए जाते हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ लड़कियों पर डालने के बजाय पुरुषों की सोच और व्यवहार पर भी बात होनी चाहिए।
इस दौरान ‘क्या लड़कियों की कीमत 20 हजार रुपये है?’ जैसे सवाल भी सामने आए। यह सवाल महिलाओं की सुरक्षा और उनके प्रति समाज के रवैये पर गुस्सा और चिंता जाहिर करता है।
दिल्ली में हाल के दिनों में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से जुड़े कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा, पुलिस व्यवस्था और निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिर्फ कानून और योजनाएं ही काफी नहीं हैं। सुरक्षित सड़कें, बेहतर रोशनी, निगरानी, तेज पुलिस कार्रवाई और समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी माने जा रहे हैं।

