• Wed. Jul 15th, 2026

दिशा सालियान केस में पुलिस का जवाब: नहीं हुआ था बलात्कार, कोर्ट में हलफनामा दायर

Report By : ICN Network

बॉम्बे हाईकोर्ट में साल 2020 में हुई दिशा सालियान की मौत के मामले में एक अहम सुनवाई हुई। इस दौरान मालवणी पुलिस स्टेशन ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए साफ किया कि दिशा के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण नहीं हुआ था। मेडिकल रिपोर्ट और जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है।

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मलाड (पश्चिम) की एक ऊंची इमारत से गिरने से मौत हो गई थी। दिशा के पिता सतीश सालियान ने बेटी की मौत पर सवाल उठाते हुए कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिशा के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या की गई और इसे राजनीतिक दबाव में आत्महत्या करार दिया गया।

उन्होंने इस मामले में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।

मालवणी पुलिस ने कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा है कि दिशा की मौत को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे झूठे हैं। मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने जांच के सभी तथ्यों कोर्ट के सामने रखे और यह भी बताया कि जांच के दौरान किसी प्रकार की राजनीतिक दबाव की बात सामने नहीं आई।

दिशा के करीबी दोस्तों ने पुलिस को बताया कि वह अपने पारिवारिक विवादों और करियर को लेकर तनाव में थी। इसके अलावा घटना वाली रात वह नशे में थी, जिसकी पुष्टि फॉरेंसिक साइंस लैब ने भी की है। दोस्तों के बयानों के अनुसार, दिशा ने भारी मानसिक दबाव के चलते खुदखुशी जैसा कदम उठाया।

इस केस में आदित्य ठाकरे ने भी हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं और अदालत के आदेशों से उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। इस दौरान सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों पर विचार किया जाएगा।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

Don't Miss

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}