• Fri. Jun 5th, 2026

दिसंबर 2022 से मई 2026 तक: नोएडा में साइबर ठगी के 141 करोड़ से अधिक फ्रीज, 75 करोड़ पीड़ितों को लौटाए

दिसंबर 2022 से मई 2026 तक: नोएडा में साइबर ठगी के 141 करोड़ से अधिक फ्रीज, 75 करोड़ पीड़ितों को लौटाए

नोएडा में साइबर ठगी पर कड़ी कार्रवाई, 141 करोड़ से अधिक फ्रीज और 75 करोड़ परताए गए

नोएडा। कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस ने साइबर अपराधों के विरुद्ध कठोर अभियान चलाकर अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। दिसंबर 2022 से मई 2026 के बीच साइबर ठगी के मामलों में अवैध धनराशि फ्रीज कराने और पीड़ितों को लौटाने में पुलिस ने उल्लेखनीय काम किया है।

कमिश्नर लक्ष्मी सिंह तथा अपर पुलिस आयुक्त डॉ. राजीव नारायण मिश्र के निर्देशन में पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 141 करोड़ 74 लाख 17 हजार 674 रुपये की ठगी गई धनराशि फ्रीज की गई जबकि 75 करोड़ 10 लाख 80 हजार 840 रुपये पीड़ितों को पुनः वापस दिलाए गए।

पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी के गलत नेटवर्क को क्षतिग्रस्त किया गया और बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में कई अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश हुआ जो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के नाम पर सब्सिडी, नौकरियां, विदेश भेजने जैसे बहाने बनाकर धोखाधड़ी कर रहे थे। क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, मोबाइल हैकिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के माध्यम से अवैध सोने-चांदी की बिक्री भी उजागर हुई।

जुलाई 2024 में साइबर अपराधियों ने नैनीताल बैंक के सर्वर को हैक कर करीब 16 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। साइबर क्राइम पुलिस की तकनीकी जांच और नेटवर्क फॉरेंसिक के आधार पर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक नाइजीरियाई नागरिक भी शामिल था।

दिसंबर 2024 में एक कंपनी को उसके यूके स्थित वेंडर के नाम से फर्जी ईमेल भेज कर 1.55 करोड़ रुपये की ठगी की गई। पुलिस और बैंक सहयोग से यह राशि कंपनी को वापस कराई गई। इसी तरह फरवरी 2025 में जर्मनी स्थित वेंडर के नाम से फर्जी ईमेल भेज कर 5.07 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा ठगी गई, जिसे भी शीघ्र पुलिस ने बरामद कर लिया।

कमिश्नरेट की साइबर क्राइम यूनिट ने एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी गिरोह की साजिश को समय रहते नाकाम कर करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान को रोका। सचिन धामा के नेतृत्व वाली टीम ने आई4सी और एनपीसीआई के सहयोग से संदिग्ध खातों की सतर्क निगरानी की।

जांच में पता चला कि कई पीड़ितों को सोशल मीडिया पर फर्जी शेयर बाजार और निवेश योजनाओं के जरिये ठगा जा रहा था। पुलिस ने तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान में संभावित पीड़ितों को चेतावनी देकर बचाव किया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अत्याधुनिक तकनीकों, सतर्क निगरानी और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से साइबर अपराधों पर सफलता पूर्वक नियंत्रण स्थापित किया गया है। इससे आम जनता के हितों का संरक्षण सुनिश्चित हुआ है और साइबर अपराधियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं रह गया है।

Source

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)