• Wed. Jul 15th, 2026

UP-ग़ाज़ियाबाद में श्री बाँके बिहारी श्रद्धालुओं के लिए खुश ख़बरी, वृंदावन कॉरिडोर के बीच बसेगी हेरिटेज सिटी

यूपी के गाजियाबाद में श्री बाँके बिहारी जी के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। यमुना एक्सप्रेस वे को अब सीधा मंदिर से जोड़ने के लिए कोरिडोर बनाया जायेगा। यूपी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को हाई कोर्ट की तरफ से मंजूरी मिल गई है। इस कोरिडोर के बनने के बाद एक बार में तकरीबन 10 हजार श्रृद्धालु दर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों ओर हेरिटेज सिटी का भी रास्ता साफ हो जायेगा। बताया जा रहा है कि हेरिटेज सिटी सुन्दर इमारतों के साथ ही खान पान व लोगों की जरूरतों से सम्बंधित अन्य सभी सुविधाओं से सुसज्जित होगी।

जिसकी रिपोर्ट यमुना विकास प्राधिकरण की तरफ से तैयार कर ली गयी है। श्रद्धालु बढ़ेंगे तो क्षेत्र में पर्यटन विकास को भी रफ्तार मिलेगी। होटल, खाना-पान उद्योग फले-फूलेगा। परिवहन के साधनों का भी और अधिक विस्तार होगा।वृंदावन कॉरिडोर की खासियत.यमुना विकास प्राधिकरण वृंदावन को अपने क्षेत्र में लाने की योजना बना रहा है। इसकी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। ग्रेटर नोएडा शहर से वृंदावन को जोड़ने के लिए एक प्लान तैयार किया गया है। इस प्लान के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे को सीधा वृंदावन बांके बिहारी मंदिर से जोड़ा जाएगा। इसके लिए वृंदावन कॉरिडोर बनेगा। जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर 6 लेन का होगा और 100 मीटर चौड़ा होगा। इस वृंदावन कॉरिडोर के लिए हाई कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। वृंदावन कॉरिडोर के दोनों तरफ हेरिटेज सिटी का होगा निर्माणकॉरिडोर के दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण करके वहां हेरिटेज सिटी को बसाया जायेगा। यमुना विकास प्राधिकरण ने इसका प्लान तैयार कर लिया है। हेरिटेज सिटी का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। जहां से इसको मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने इसे पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि बोर्ड बैठक में हेरिटेज सिटी के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यमुना विकास प्राधिकरण जमीन का अधिग्रहण शुरू कर देगा। कॉरिडोर के दोनों ओर तमाम तरह कि गतिविधियां होंगी। यहां एक म्यूजियम बनाया जाएगा। जिसमे द्वापर काल के नंदगांव, बरसाना, गोकुल समेत करीब छह गांव विकसित किए जायेंगे।साथ ही वहां की संस्कृति को दर्शाया जायेगा।एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा का कहना है कि हेरिटेज सिटी बनने और वृन्दावन तक कोरिडोर बनने से यकीनन निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान तेजी से इस ओर आएगा। इसमें एक तरफ दिल्ली, नोएडा, गुडग़ांव, फरीदाबाद से लोग ग्रेटर नोएडा आकर लोग बसेंगे तो दूसरी तरफ आगरा, अलीगढ़, मथुरा एवं बुलंदशहर की तरफ से लोग निवेश करने एवं रहने के लिए यहां आएंगे।मिग्सन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर यश मिगलानी ने बताया कि बाँके बिहारी मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी है, ऐसे में कोरिडोर के निर्माण से श्रृद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी ही। ऐसे में पर्यटन और पर्यटक दोनों ही बढ़ेंगे, जाहिर है इससे इकोनॉमी पर सकारात्मक असर पड़ेगा। और मथुरा वृन्दावन के साथ साथ आस पास की जगह विकसित होने के साथ निवेश भी बढ़ेगा।काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी का कहना है कि “यमुना एक्सप्रेस वे से बांके बिहारी मंदिर को जोड़ने वाला ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे निश्चित तौर पर मथुरा और आगरा में रहने वाले उन लोगों को भी आकर्षित करेगा जो एनसीआर में रहना चाहते हैं। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी और निवेश भी बढ़ेगा। जिसका सीधा असर यहां के विकास पर पड़ेगा। विकास में तेजी आएगी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

Don't Miss

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}