• Wed. Jul 15th, 2026

INMUN-2025: रयान ग्रुप ने युवाओं को दी वैश्विक मंच की उड़ान

रयान ग्रुपरयान ग्रुप

INMUN-2025: रयान इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. ए.एफ. पिंटो और प्रबंध निदेशक डॉ. ग्रेस पिंटो के मार्गदर्शन में आयोजित इंडियन मॉडल यूनाइटेड नेशंस (आईएनएमयूएन-2025) सम्मेलन ने युवा नेतृत्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1 और 2 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड पर हुए इस 23वें संस्करण में 75 स्कूलों से 900 से अधिक छात्रों ने 150 देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए हिस्सा लिया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में छात्रों ने यूएनजीए 1, यूएनजीए 3, डब्ल्यूएसएफ, यूएनडीपी, ईसीओएसओसी, डब्ल्यूटीओ, यूएनएससी, यूएनओसी, जी20 और नाटो जैसी 10 समितियों में वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा की। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श के साथ-साथ, छात्रों ने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए और आपसी समझ व भाईचारे को मजबूत किया। रयान ग्रुप के निदेशक डॉ. स्नेहल पिंटो ने प्रतिभागियों के शोध, रचनात्मकता और वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उनकी असीम संभावनाओं को रेखांकित किया।

सम्मेलन का समापन 3 सितंबर 2025 को सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में एक भव्य नेतृत्व शिखर सम्मेलन के साथ हुआ। इस अवसर पर छात्रों को भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत महामहिम श्री हेरवे डेल्फिन, भारत में डेनमार्क के राजदूत महामहिम श्री रासमुस एबिलगार्ड क्रिस्टेंसन और भारत में आइसलैंड के राजदूत महामहिम श्री बेनेडिक्ट होस्कुल्डसन के साथ संवाद करने का अवसर मिला। इन राजनयिकों ने अपनी प्रेरक कहानियों और अनुभवों से छात्रों को प्रेरित किया, जबकि छात्रों के विचारशील प्रश्नों ने चर्चा को और गहराई दी। रयान ग्रुप के छात्रों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस अवसर को और यादगार बना दिया।

कार्यक्रम का समापन एक शानदार पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें विजेताओं को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए ट्रॉफियां प्रदान की गईं। पूरे आयोजन के दौरान, डॉ. ग्रेस पिंटो और डॉ. स्नेहल पिंटो ने छात्रों को कूटनीति, उत्कृष्टता और वैश्विक बेहतरी के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित किया। यह सम्मेलन न केवल युवा नेताओं के लिए एक मंच साबित हुआ, बल्कि एक उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखी।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

Don't Miss

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}