दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच विवाद बढ़ गया है। कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारियों ने प्रदर्शन से कारोबार पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की मांग की है। वहीं, CJP के प्रमुख अभिजीत दिपके ने व्यापारियों की आपत्तियों पर अपनी बात रखी है।
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
अभिजीत दिपके का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कारोबार को नुकसान नहीं होता, बल्कि सरकार की पाबंदियों से लोगों और व्यापारियों को परेशानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार पूरे शहर में बंद जैसी स्थिति बनाती है, इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाती है और लोगों की आवाजाही सीमित करती है, तब कारोबार प्रभावित होता है।
दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलती है। उनके मुताबिक, पार्टी ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जयपुर में उन पर हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं की।
व्यापारियों को किस बात की चिंता है?
व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग, सड़कें बंद होने और रास्ते बदलने से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पाते। इससे सामान की डिलीवरी और कर्मचारियों के आने-जाने में भी परेशानी होती है।
व्यापारियों ने यह आशंका भी जताई है कि भीड़ बढ़ने या किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों को रास्ता मिलने में दिक्कत हो सकती है। उनका सुझाव है कि प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे खुले स्थानों का इस्तेमाल किया जाए।
प्रदर्शन के अधिकार पर भी उठी बहस
अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार से सवाल पूछना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगना गलत नहीं है। उनके अनुसार, ये लोकतंत्र और संविधान से मिले अधिकार हैं।
वहीं, व्यापारियों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कारोबार पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस पूरे विवाद में प्रदर्शन करने के अधिकार, आम लोगों की सुरक्षा और व्यापारियों की रोजी-रोटी जैसे मुद्दे सामने आ गए हैं।

