नोएडा में जेपी इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट्स में फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति को लेकर निगरानी कमेटी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार, पैसों की कमी और फ्लैटों की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
हजारों परिवारों को अब भी अपने घर का इंतजार
जेपी विशटाउन प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में खरीदार लंबे समय से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 97 अटके हुए प्रोजेक्ट्स में 10,164 आवासीय यूनिट्स का काम प्रभावित है। निर्माण की धीमी गति के कारण घर खरीदारों को समय पर फ्लैट मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है।
फंडिंग की कमी भी बड़ी परेशानी
रिपोर्ट में प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए जरूरी पैसों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। समाधान योजना के तहत करीब 3,000 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल जुटाने की बात कही गई थी। कमेटी के अनुसार, इस फंडिंग व्यवस्था को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पैसे की कमी का असर निर्माण कार्य की गति पर पड़ सकता है।
निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल
कमेटी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इमारतें तय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरें।
सुरक्ष ग्रुप ने रिपोर्ट पर जताई असहमति
जेपी इंफ्राटेक से जुड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी संभाल रहे सुरक्ष ग्रुप ने कमेटी की रिपोर्ट से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह समाधान योजना के अनुसार काम कर रही है और प्रगति का आकलन करने के लिए अपनाए गए मानकों पर भी सवाल उठाए हैं।
अब NCLT के अगले कदम पर नजर
रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब NCLT के अगले निर्देशों पर नजर रहेगी। घर खरीदारों को उम्मीद है कि मामले में जल्द फैसला होगा और अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, सभी खरीदारों को अपने घरों की चाबी मिलने की निश्चित तारीख का इंतजार है।

