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जेफ बेजोस का कहना है कि कविता बिना तुकबंदी के आसान है – लेकिन यह इतना सरल नहीं है

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Jun 4, 2026 #'rime', #source
Jeff Bezos says poetry without rhyming is easy – but it’s not that simple

जेफ बेजोस ने कविता और पत्रकारिता पर दी नई व्याख्या

वॉशिंगटन पोस्ट में हालिया बड़े पैमाने पर छंटनी के समर्थन में जेफ बेजोस ने कविता को एक अनूठे दृष्टिकोण से समझाया है। उन्होंने कहा कि बिना तुकबंदी वाली कविता सरल लगती है, पर यह वास्तव में उतनी आसान नहीं होती जितना लगता है।

अखबार को सब्सिडी देने के सवाल पर बेजोस ने स्पष्ट किया कि भुगतान ‘संबंधितता का संकेत’ है। उन्होंने कहा कि यदि लोग हमारे उत्पाद के लिए भुगतान नहीं करते, तो इसका मतलब है कि हम एक अच्छा उत्पाद नहीं बना रहे। उनकी तुलना कविता से करते हुए कहा, ‘‘यह बिना तुकबंदी वाली कविता जैसी होगी जो बहुत आसान हो जाती है।’’

उनकी यह तुलना तुरंत आलोचना और मज़ाक का कारण बनी। कईयों ने इसे गलत समझा और कुछ साहित्यिक आलोचकों ने इसका व्यंग्य किया। लेकिन बेजोस का तात्पर्य केवल तुकबंदी से नहीं था, बल्कि वह उस सीमा या दबाव की बात कर रहे थे जो गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

कविता और तुकबंदी के बीच का अंतर

अंग्रेज़ी कविता में तुकबंदी एक पहचाननीय तत्व है जो सुनने में आनंददायक लगता है और प्रयास को दर्शाता है। तुकबंदी की उपस्थिति सुनहरे नियम की तरह होती है, जो कविता को गंभीरता प्रदान करती है। मध्य अंग्रेज़ी में ‘rime’ का अर्थ केवल तुकबंदी नहीं था, बल्कि यह कविता के संरचनात्मक पहलुओं का भी सूचक था।

बेजोस ने जो बात रेखांकित की वह यह है कि बिना किसी बाहरी दबाव के – जैसे पत्रकारिता में लाभप्रदता या कविता में तुकबंदी – काम आसान और आत्मसंतुष्ट हो सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में, वे कविता को एक संपूर्णता के रूप में देखते हैं, न कि केवल तुकों की श्रृंखला के रूप में।

इसलिए, उनकी टिप्पणी का सार यह है कि आर्ट और मीडिया दोनों ही तब बेहतर होते हैं जब उनमें कुछ प्रतिबंध और लक्ष्य होते हैं, जो उन्हें उद्देश्यपूर्ण और गुणवत्ता प्रधान बनाते हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)