महाराष्ट्र सरकार ने रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को राज्य की समान नागरिक संहिता (UCC) समिति में सदस्य-सह-वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया है। यह नियुक्ति बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरसी चव्हाण के समिति से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद हुई है।
महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बनाई थी। इस समिति का काम राज्य में UCC लागू करने के लिए ड्राफ्ट और सुझाव तैयार करना है। UCC के तहत शादी, तलाक, विरासत और दूसरे निजी मामलों से जुड़े कानूनों को सभी समुदायों के लिए एक जैसा करने का प्रस्ताव है।
जस्टिस आरसी चव्हाण ने क्यों दिया इस्तीफा?
बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरसी चव्हाण ने 19 सितंबर को समिति से इस्तीफा दिया था। उन्होंने लोगों से राय लेने के तरीके और समिति की बैठकों में ऐसे व्यक्ति की मौजूदगी पर सवाल उठाए थे, जो उस समय आधिकारिक तौर पर समिति के सदस्य नहीं थे।
चव्हाण का कहना था कि UCC जैसे सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों पर लोगों को सिर्फ ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनका सुझाव था कि लोगों को अपनी राय विस्तार से रखने का मौका मिलना चाहिए।
शत्रुघ्न सिंह को क्यों चुना गया?
शत्रुघ्न सिंह उत्तराखंड कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। वह उत्तराखंड में UCC के नियम तैयार करने और इसे लागू करने से जुड़े काम में भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र की UCC समिति की अध्यक्ष रंजना देसाई भी उत्तराखंड में UCC से जुड़े काम में उनके साथ काम कर चुकी हैं।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सिंह को समिति में शामिल करने का सुझाव खुद समिति की अध्यक्ष रंजना देसाई की ओर से आया था। सरकार ने इसके बाद उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी।
महाराष्ट्र में UCC पर चल रहा है काम
महाराष्ट्र की UCC समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। समिति UCC के कानूनी, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहलुओं पर काम करेगी और दूसरे राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन करेगी।
समिति में रिटायर्ड बॉम्बे हाई कोर्ट जस्टिस एसजी मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पतंगे और शिक्षा विशेषज्ञ सुवर्णा रावल भी शामिल हैं।
उत्तराखंड में लागू हो चुका है UCC
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC कानून लागू हुआ। वहां विधानसभा ने फरवरी 2024 में UCC बिल पास किया था और कानून जनवरी 2025 में लागू हुआ। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी UCC से जुड़े कानून पारित किए जा चुके हैं।

