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बसपा में बड़ा परिवर्तन संभव? मायावती को भतीजे आकाश पर संदेह, दी सख्त चेतावनी

Report By : ICN Network

आकाश आनंद: बसपा में नेतृत्व को लेकर घमासान, मायावती के पोस्ट से नए संकेत

बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक पांच पोस्ट कर अपने उत्तराधिकारी को लेकर नए संकेत दिए। उन्होंने लिखा, “कांशीराम की तरह ही मेरे जीते जी पार्टी व मूवमेंट का कोई उत्तराधिकारी तभी बनेगा, जब वह हर दुख-तकलीफ उठाकर, उसे आगे बढ़ाने में जुटा रहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि कांशीराम ने अंबेडकर के मानवतावादी विचारों को सत्ता तक पहुंचाने के लिए अपना सबकुछ त्यागकर बसपा की स्थापना की थी। खुद को कांशीराम की शिष्या बताते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष और कुर्बानी देती रहेंगी।

मायावती के पोस्ट को आकाश आनंद के लिए चेतावनी माना जा रहा

मायावती के इस बयान को उनके भतीजे और घोषित उत्तराधिकारी आकाश आनंद के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह भी साफ संकेत मिल रहे हैं कि अगर आकाश आनंद ने उनके तय किए गए तौर-तरीकों पर काम नहीं किया तो उनकी उत्तराधिकारी बनने की राह मुश्किल हो सकती है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}