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मुंबई के सर्जनों ने 11 वर्षीय बालिका के थायरॉयड ग्लैंड में फंसा मछली की हड्डी निकाली

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Jun 23, 2026 #source
Mumbai Surgeons Remove Fish Bone Lodged Inside 11-Year-Old Girl's Thyroid Gland

मुंबई में दुर्लभ चिकित्सा मामला: 11 वर्षीय बालिका के थायरॉयड में फंसी मछली की हड्डी का सफल निष्कासन

डॉ. चन्द्रवीर सिंह, सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी एवं हेड और नेक ऑन्कोसर्जन, वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ चिकित्सक दल ने एक 11 वर्षीय लड़की के थायरॉयड ग्लैंड से मछली की हड्डी को सफलतापूर्वक निकालने में विशेष सफलता प्राप्त की। यह दुर्लभ मामला तब सामने आया जब मछली की हड्डी भोजन नली को छेदकर थायरॉयड में प्रविष्ट हो गई, जिससे थायरॉयड में गंभीर संक्रमण और फोड़ा बन गया था।

11 वर्षीय रोगी मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में गले में लगातार दर्द और निगलने में कठिनाई की शिकायत लेकर आई थी, जो मछली खाने के बाद उत्पन्न हुई थी। सामान्यतः इस तरह के लक्षण मछली की हड्डी के गले या भोजन नली में फंसे होने का संकेत होते हैं, लेकिन प्रारंभिक ऊपरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी में कोई विदेशी वस्तु नहीं मिली।

यह असामान्य जटिलता देखते हुए चिकित्सकों ने गर्दन का सीटी स्कैन कराया, जिसमें चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। मछली की हड्डी भोजन नली की दीवार को छेदते हुए थायरॉयड ग्लैंड के बाएं लोब में चले गई थी, जहां उसने गहरा संक्रमण और मवाद का संचय उत्पन्न कर दिया था।

डॉ. चन्द्रवीर सिंह के अनुसार, यह मामला अत्यंत दुर्लभ था क्योंकि भोजन नली के बाहर जाकर थायरॉयड में फैली विदेशी वस्तु को साधारण एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं से निकालना संभव नहीं होता।

डॉ. सिंह ने बताया, “जब मरीज हमारे पास आई, तब मछली की हड्डी पहले ही थायरॉयड ग्लैंड में प्रवेश कर चुकी थी और संक्रमण उत्पन्न हो चुका था। जब विदेशी वस्तु भोजन नली छोड़कर आसपास के ऊतकों में चली जाती है, तो ओपन सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी उपचार विकल्प बन जाती है।”

रोगी को पहले इंट्रावेनस एंटीबायोटिक्स के माध्यम से स्थिर करने के पश्चात वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के सर्जिकल दल ने डॉ. चन्द्रवीर सिंह और डॉ. शीतल राडिया के नेतृत्व में एक जटिल खुली नेक सर्जरी की। इस प्रक्रिया में संक्रमित थायरॉयड ग्रंथि की गहन जांच, फोड़े का निकासा, मछली की हड्डी को ढूंढ़ना और निकालना शामिल था। यह सर्जरी विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि के पास के महत्वपूर्ण तंत्रिकाएं जैसे रिकरेंट लैरिंजियल स्नायु और सुपीरियर लैरिंजियल स्नायु जो आवाज के नियंत्रण में भूमिका निभाते हैं, तथा कैल्शियम स्तर नियंत्रित करने वाले पैराथायरॉयड ग्लैंड्स नजदीक ही स्थित हैं।

डॉ. सिंह ने कहा, “इन नाड़ियों को चोट लगने से स्थायी आवाज की क्षति हो सकती थी, जबकि पैराथायरॉयड ग्लैंड्स का नुकसान आजीवन कैल्शियम संबंधी जटिलताएं उत्पन्न कर सकता था। संक्रमण और मवाद के कारण सर्जरी और भी सावधानीपूर्वक करनी पड़ी। इन सभी महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा करते हुए विदेशी वस्तु को सफलतापूर्वक निकालना सर्वोपरि था।”

सर्जरी सफलतापूर्वक पूर्ण हुई और 11 वर्षीय लड़की ने उत्कृष्ट स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। उसकी आवाज सामान्य रही, कैल्शियम स्तर भी संतुलित है और वह बिना किसी जटिलता के अपने दैनिक कार्यों में पूर्णतः सूचारू रूप से लौट आई है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मछली की हड्डी निगलना विशेषकर तटीय क्षेत्रों और मछली पर निर्भर आहार वाले समुदायों में सामान्य बात है। अधिकांश मामलों में हड्डी टॉन्सिल या ऊपरी भोजन नली में फंसती है और एंडोस्कोपी द्वारा आसानी से निकाली जा सकती है। लेकिन भोजन नली की दीवार को पार कर थायरॉयड में प्रवेश करना और थायरॉयड फोड़ा बनना अत्यंत अपवादपूर्ण और दुर्लभ स्थिति है जिसे विश्वभर में ही न्यूनतम मामलों में रिपोर्ट किया गया है।

वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के चिकित्सक कहते हैं कि यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि मछली खाने के बाद लगातार गले में दर्द, गर्दन में बेचैनी या निगलने में कठिनाई को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। प्रारंभिक जांच सामान्य पाए जाने पर भी गुप्त जटिलताओं का पता लगाने के लिए आगे की छवियों का सहारा लेना आवश्यक होता है ताकि समय पर उपचार हो सके और गंभीर परिणामों से बचा जा सके।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)