मुस्लिम और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए महाराष्ट्र सरकार से आग्रह
महाराष्ट्र में प्रस्तावित एकीकृत नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे के लिए गठित समिति में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधि शामिल करने की मांग मुस्लिम नेता एवं संगठन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह समिति सभी प्रभावित समुदायों की विविधता को प्रतिबिंबित करे।
पूर्व कांग्रेस सांसद हुसैन दलवाई और समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें उन्होंने कहा कि UCC एक संवेदनशील विषय है जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है और इसे सभी धार्मिक समुदायों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही तैयार किया जाना चाहिए।
समिति के वर्तमान सात सदस्यों में मुस्लिम और ईसाई समुदायों का प्रतिनिधित्व न होने पर नेताओं ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह संयोजन समावेशन और सहभागी लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पैनल की संरचना पर पुनर्विचार करें और मसौदे के प्रारंभ से पहले दोनों समुदायों के विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों को शामिल करें।
इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र मुस्लिम फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोहर पार्कर से मुलाकात की और विशेष व्यापक संशोधन (SIR) के तहत जारी चुनावी सूची के दो महीने के विस्तार का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि भारी वर्षा, बुवाई का मौसम और प्रवासन की वजह से कई नागरिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के संपर्क नंबर और कार्यालयों की जानकारी जनता के लिए सुलभ बनाने, दस्तावेजी आवश्यकताओं में छूट देने, स्वीकार्य पहचान दस्तावेजों की सूची विस्तार करने, कानूनी रूप से परिवर्तित नामों को मान्यता देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दिए कि प्रक्रिया या तकनीकी कठिनाइयों के कारण कोई पात्र मतदाता मतदान से वंचित न रहे।
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