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Noida News: नोएडा सेक्टर 64 के पास हुंडई वरना कार में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू, कोई हताहत नहीं

हुंडई वरना कार में लगी भीषण आगहुंडई वरना कार में लगी भीषण आग

Noida News: सेक्टर 64 के पास सड़क पर खड़ी एक हुंडई वरना कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कार आग के शोलों में घिर गई। घटनास्थल के पास से गुजर रहे लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आग बुझाने की कोशिश की और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। हालांकि, दमकल गाड़ी के पहुंचने से पहले ही कार पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।

आग की लपटों से धू-धू कर जलती कार का मंजर बेहद भयावह था। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रदीप कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर स्टेशन से तत्काल फायर टेंडर रवाना किए गए। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि गाजियाबाद से नोएडा के सेक्टर 62 की ओर आने वाली सड़क पर सेक्टर 64 के पास खड़ी सीएनजी/पेट्रोल से चलने वाली हुंडई वरना कार में आग लगी थी। फायर सर्विस यूनिट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}