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लुटेरी दुल्हन ने दारोगाजी से शादी की, राज खुलने पर पुलिस ने साथ नहीं दिया

Report By : ICN Network
UP Crime एक चौंकाने वाली घटना में मेरठ और बुलंदशहर पुलिस ने एक लुटेरी दुल्हन का भंडाफोड़ किया है जिसने एक दारोगा के घर पर जबरन कब्जा कर लिया और छह दिन तक रही। इस दौरान उसने घर से लाखों रुपये के जेवर और नकदी चुरा ली। पीड़ित दारोगा ने आरोप लगाया है कि कथित पत्नी ने पहले भी दो अन्य लोगों से शादी की थी

ग्वालटोली थाने में तैनात एक दारोगा की कथित पत्नी, जिसे लुटेरी दुल्हन कहा जा रहा है, ने उनके बुलंदशहर स्थित घर पर जबरन कब्जा कर लिया और छह दिन तक वहां रही। जब उसके खिलाफ ग्वालटोली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया, तो वह ताला लगाकर फरार हो गई। आरोप है कि पीड़ित दारोगा ने एसएसपी बुलंदशहर से शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास नहीं किया। बुधवार को दारोगा और ग्रामीणों की मदद से जब वह घर में दाखिल हुए, तो घर में बिखरे हुए थे। सीसीटीवी कैमरे कपड़ों से बंधे हुए थे, खिड़की की जाली टूटी हुई थी, और बक्से से नकदी और लाखों रुपये के जेवर गायब थे

पीड़ित दारोगा ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा किया और थाने में तहरीर दी। उन्होंने कहा कि वह विभाग में हैं, इसलिए पुलिस कुछ नहीं कर सकती है और उनकी मदद नहीं की जा रही है।

इस मामले में यह भी सामने आया कि दारोगा की कथित पत्नी ने पहले लखनऊ के एक दारोगा और एक अन्य व्यक्ति से भी शादी की थी। उसके बैंक खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन भी पाए गए। इसके अलावा, जब दारोगा ने विरोध किया, तो कथित पत्नी ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में हंगामा किया और दारोगा पर आरोप लगाए कि वह इंटरनेट मीडिया के जरिए युवतियों से दोस्ती कर उनकी फोटो-वीडियो निकालकर ब्लैकमेल करते थे

दारोगा ने बताया कि 10 जनवरी को उनकी कथित पत्नी ने घर का ताला तोड़कर उसमें कब्जा कर लिया था, और घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड भी हुई थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 13 जनवरी को ग्वालटोली थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद, 15 जनवरी को वह घर पर ताला लगाकर फरार हो गई

बुधवार को दारोगा ने बुलंदशहर पुलिस और ग्रामीणों के सामने अपने घर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद, घर में बक्से के ताले टूटे हुए थे, खिड़की की जाली टूटी हुई थी, और लाखों के जेवर और नकदी गायब थे। साथ ही, देखा गया कि 15 जनवरी को डीवीआर तीन घंटे तक बंद था

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

आप थके हुए हैं पर आपका दिमाग जगा हुआ क्यों है
{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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