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छत्रपति शिवाजी स्मारक के लिए 9.46 करोड़ की लागत से होगा भूमि अधिग्रहण, सीएम योगी ने दी सहमति

Report By : ICN Network

आगरा। कोठी मीना बाजार में छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में भव्य स्मारक निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर इस ऐतिहासिक स्मारक के लिए भूमि और कोठी के अधिग्रहण हेतु 9.46 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ने इस पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

इस परियोजना के अंतर्गत 2946.75 वर्ग मीटर भूमि और एक कोठी का अधिग्रहण प्रस्तावित है। प्रस्ताव के अनुसार, भूमि का अनुमानित मुआवजा 3.24 करोड़ रुपये और भवन का मूल्य 86.81 लाख रुपये आंका गया है। इसमें 100% सोलैशियम और ब्याज को जोड़कर राशि लगभग 8.60 करोड़ तक पहुंचती है। अर्जन खर्च जोड़ने पर कुल लागत 9.46 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।

उल्लेखनीय है कि इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व है। इतिहास संकलन समिति के शोध के अनुसार, मुग़ल शासक औरंगज़ेब ने शिवाजी महाराज को यहीं धोखे से बंदी बनाया था, जहां से वे चतुराई से भाग निकले थे। यही कारण है कि इस स्मारक को महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जा रहा है।

इस परियोजना को लेकर अप्रैल में एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई थी, जिसमें मंडलायुक्त, डीएम और एडीए उपाध्यक्ष शामिल हुए थे। बैठक के बाद डीएम ने प्रस्ताव बनाकर पर्यटन महानिदेशक को भेजा था।

हालांकि, कोठी मीना बाजार से संबंधित सात वाद फिलहाल न्यायालय में लंबित हैं। ऐसे में अधिग्रहण की धनराशि न्यायालय में जमा कराई जाएगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया में बाधा न आए।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}