तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती: तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन को लेकर उच्च न्यायालय के निर्णय पर विवाद
तमिलनाडु की नई तमिळगा वेट्ट्री कज़ागम सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के एक जनवारिए प्रक्रिया आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह आदेश तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित एक पत्थर के स्तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति देता है। लाइव लॉ ने मंगलवार को इस घटना की सूचना दी।
विजय नेतृत्व वाली सरकार ने 11 जून को इस हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
1 दिसंबर को हाईकोर्ट के न्यायाधीश जीआर स्वामीनाथन ने यह निर्णय दिया कि तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी के पत्थर के स्तंभ को दीपथून कहा जा सकता है, जो विशेष रूप से दीपक जलाने के लिए बनाया गया होता है। न्यायाधीश ने मंदिर प्रशासन से इस परंपरा को पुनः स्थापित करने का निर्देश दिया, जो कुछ मंदिर भक्तों ने दीप जलाने की अनुमति के लिए जारी की थी।
स्वामीनाथन ने यह भी कहा कि यह प्रथा नजदीकी मुस्लिम दरगाह के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती।
यह स्थल अरुलमिगु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह, दोनों का घर है।
पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कड़गम सरकार, मंदिर प्रशासन और दरगाह प्रबंधन समेत अन्य पक्षों ने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी, जिसमें कानून-व्यवस्था, स्थल की संपत्ति और अनुमोदित पूजा के स्वरूप को लेकर संदेह जताया गया।
6 जनवरी को हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने स्वामीनाथन के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि पत्थर का यह स्तंभ उसकी जमीन पर स्थित है जो सुब्रमणिया मंदिर की संपत्ति है।
यह विवाद धार्मिक स्थलों की सहअस्तित्विता और विशेष पूजा प्रथाओं के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को उजागर करता है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां उच्च न्यायालय के आदेश की वैधता पर अंतिम निर्णय होना है।
इस केस की सुनवाई से धार्मिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर महत्वपूर्ण न्यायिक मिसालें सामने आ सकती हैं।
अधिक विवरण के लिए बने रहिए।