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UK-उत्तराखंड के अल्मोड़ा डीएम के निर्देश पर सीमांत क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए लगेगी फेंसिंग

UK-उत्तराखंड के अल्मोड़ा चंपावत के लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र के नेपाल सीमा से लगे महाकाली नदी के किनारे कृषि बाहुल्य क्षेत्र नगरूघाट, कुसमोदघाट , नकेला व मटियानी आदि क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसलों को बचाने व अन्य सुविधा देने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के द्वारा डीएम चंपावत नवनीत पांडे से करी गई थी डीएम पांडे ने ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान लेते हुए खंड विकास अधिकारी लोहाघाट को क्षेत्र का निरीक्षण करने के व ग्रामीणों की समस्या सुनने के निर्देश दिए थे जिसके बाद इस सीमांत क्षेत्र में पहली बार खंड विकास अधिकारी अशोक अधिकारी के कदम पड़े उनके द्वारा नगरू घाट ,कुसमोदघाट नकेला मटियानी आदि क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया तथा ग्रामीणों की समस्या को सुना गया वहीं पहली बार अपने बीच बीडीओ को पाकर ग्रामीण काफी खुश नजर आए तथा ग्रामीणों ने बीडीओ अधिकारी सामने अपनी समस्या को प्रमुखता से रखा ।

बीडीओ अशोक अधिकारी ने बताया ग्रामीणों की प्रमुख समस्या जंगली जानवरों से फसलों को बचाने व सिंचाई की थी जिस पर इन क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए 700 मी फेंसिंग लगाई जाएगी तथा मनरेगा से पाइप गूल और सिंचाई टैंक बनवाए जाएंगे इसके अलावा कृषि विभाग के सहयोग से कुसमोदघाट व मटियानी क्षेत्र को एक-एक ट्रैक्टर दिया जाएगा तथा ग्रामीणों की अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा वीडिओ अधिकारी ने कहा क्षेत्र की निरीक्षण रिपोर्ट डीएम चंपावत को भेजी जाएगी वही क्षेत्र पंचायत सदस्य कैलाश सिंह वह किसान नेता मोहन चंद्र पांडे के द्वारा क्षेत्र की सुध लेने व किसानो की समस्या के समाधान के लिए डीएम चंपावत व वीडिओ लोहाघाट को धन्यवाद दिया गया उन्होंने कहा आज भी इन क्षेत्रों के ग्रामीण अपनी परंपरागत खेती करते हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करता पड़ता है उन्होंने कहा इन किसानों को अगर सुविधा दी जाए तो वह कृषि से काफी अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं तथा आज भी इन क्षेत्रों से पलायन नहीं हुआ है लोग खेती कर अपना जीवन यापन करते हैं उन्होंने कहा यह क्षेत्र लाल धान , गहत ,मड़वा ,साग सब्जी आदि के लिए काफी प्रसिद्ध है उन्होंने सरकार व प्रशासन से इन क्षेत्रों की ओर ज्यादा ध्यान देने तथा सुविधा देने की मांग करी है निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान पाशम चंद्रकांत तिवारी, क्षेत्र पंचायत सदस्य कैलाश सामंत व ग्रामीण मौजूद रहे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}