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UP- बाघ के हमले में किसान की हुई मौत ,गुस्साए मृतक के परिजनों ने वन विभाग को घेरा

यूपी के पीलीभीत में फसल की रखवाली करने गए किसान पर घात लगाए बैठे बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया, घटना को देख आस पास खेतो में काम कर रहे ग्रामीणो ने किसी तरह म्रतक के शव को बाघ के चंगुल से छुड़ाया। वहीं घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम के न पहुचने पर वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शूरू कर दिया है। घटना थाना माधौटांडा क्षेत्र स्थित दीप पुरैनी नगर गांव की है।

दरअसल सुबह दीप नगर पुरैनी निवासी स्वरूप सिंह पुत्र सोवरन सिंह जंगल किनारे स्थित अपने खेत में पानी लगाकर फसल की रखवाली कर रहे थे उसी दौरान घात लगाए बैठे बाघ ने किसान पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया, घटना को देख आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने की पुकार कर बाघ के जबड़े से किसी तरह मटक किसान के सबको छुड़ाया घटना की जानकारी वन विभाग को दी गई लेकिन मानव मौके पर नहीं पहुंचा जिसके बाद आकर्षित ग्रामीणों ने सबको हाईवे पर रखा वन विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया सूचना पर भारी संख्या में पहुंची पुलिस फोर्स ने किसी तरह ग्रामीणों को समझो जाकर मृतक सबको कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

वन्य जीव एक्सपर्ट अमिताभ अग्निहोत्री का कहना है,, पीलीभीत में बाघ हमले की घटनाएं आम हो गई है बीटेक 6 महीने के भीतर लगभग आदत दर्जन लोगों को बाग अपना निवाला बन चुका है वन विभाग इन घटनाओं को रोकने में नाकाम है ऐसे में जंगल की तार फेंसिंग कर कर बाबू को जंगल के अंदर ही रखना चाहिए इससे न केवल बाघ जंगल के भीतर रहेंगे बल्कि मानव एवं वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं थी काम हो सकेगी।
dfo नवीन खण्डेलवाल ने बताया आज सुबह पुरैनी दीपनगर गांव में बाघ हमले में किसान की मौत की सूचना मिली है घटना स्थल पर टीम रवाना कर दी है, मौके पर स्थिति सामान्य पूर्ण है अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}