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UP-नई शिक्षा नीति पूरे देश मे लागू हुई, भारत मां को विश्व गुरु बनाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाएं – ब्रजेश पाठक

यूपी के कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर दीप प्रज्वलकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तत्पश्चात छात्र व छात्राओं द्धारा रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया

मंच से डिप्टी सीएम ने अपने उद्बोधन में कहा कि लगभग 500 सौ वर्षों बाद कुछ घंटों के बाद अयोध्या में रामलला विराजेंगे ,क्योंकि रामराज में गुरुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और प्रभु श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में गुरुओं का ही हाथ रहा है इसीलिए पूरे विश्व में गुरुओं का दर्जा सर्व मान्य रहा है,उन्होंने कहा कि भारत सरकार व प्रदेश सरकार की योजना जन जनता तक पहुंच रही है और यह योजनाओं को बचाने का कार्य केवल बीजेपी के ही कार्यकाल में हुआ है।

मीडिया से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी विश्वविद्यालयों के साथ कटिबद्धता से खड़ी है प्रधानमंत्री मोदी ने नई शिक्षा नीति पूरे देश में लागू करी है नई शिक्षा नीति हमारे शिक्षकों पर गुरुत्व दायित्व है की कि उसे लागू करें और भारत मां को विश्व गुरु बनाएं के लिए अग्रणी भूमिका निभाएं।अयोध्या मंदिर के लिए उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम मंदिर में विराज चुके हैं और पूरा भारतवर्ष बल्कि कहे पूरा विश्व इस ऐतिहासिक पल को मनाने में अपने-अपने स्तर से सम्मिलित हो रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करेंगे और इसके बाद सरकार सभी आम जनमानस के लिए व्यवस्थाएं करेगी कि उनको भी प्रभु राम के दर्शन हो सके।अन्य राजनैतिक पार्टी के बयान बाजी पर मीडिया द्धारा सवाल पूछने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब हमारे घर में कोई शादी विवाह या कोई भी शुभ काम होता है जिससे कि सभी का मन्य प्रफुल्लित हो ऐसे में हम कोई ब्यान बाजी का करके खुशियां मानते हैं।16 वर्ष तक के बच्चों को कोचिंग जाने के रोक के संबंध में उन्होंने कहा कि अभी केंद्र सरकार ने जो निर्णय लिया है जो कोचिंग संस्थानों में कम उम्र के बच्चे जो की 16 वर्ष से नीचे हैं उनके बारे में एक विशेष कार्य योजना केंद्र सरकार ने जारी किया है यह सब बच्चों के गुणवत्ता परख शिक्षा के लिए हुआ है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}