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UP News: PM मोदी से मिलने के बाद आचार्य प्रमोद ने छोड़ी कांग्रेस ? जानें वायरल हो रहे लेटर का सच…

ByIcndesk

Feb 2, 2024

Report By : Himanshu Garg (UP News)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद क्या कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है ? ये सवाल देर शाम से राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सवाल को हवा तब लगी जब आचार्य प्रमोद का कांग्रेस से तत्काल प्रभाव से निष्कासित होने का एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि इस लेटर को लेकर कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल बयान सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम अक्सर अपने बेबाक बयानों के चर्चा राजनीति में चर्चा का विषय बने रहते है। यहीं नहीं वह पार्टी लाइन से हटकर बयान देते है। बात अगर राम मंदिर के न्यौते की करें तो उन्होंने पार्टी के फैसले को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।

पीएम मोदी से की थी मुलाकात
दरअसल, हाल ही में कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर कई तरह की चर्चाएं होने लगी। हालांकि पीएम मोदी और आचार्य प्रमोद कृष्णम की यह मुलाकात एक निमंत्रण को लेकर हुई थी। इस मुलाकात में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी को कल्कि धाम उत्सव में आने का निमंत्रण दिया था। वहीं पीएम मोदी ने भी आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था।

X पर शेयर की थी फोटो
बताते चले कि पीएम मोदी से हुई मुलाकात के फोटो आचार्य प्रमोद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर शेयर की। साथ ही लिखा कि “19 फरवरी को आयोजित “श्री कल्कि धाम” के शिलान्यास समारोह में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, मेरे इस पवित्र “भाव” को स्वीकार करने के लिये माननीय प्रधानमंत्री का हार्दिक आभार एवं साधुवाद.” वहीं पीएम मोदी ने यह निमंत्रण स्वीकार करते हुए लिखा-“आस्था और भक्ति से जुड़े इस पावन अवसर का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। निमंत्रण के लिए आपका हृदय से आभार आचार्य प्रमोद कृष्णम।”

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}